ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
Om Ugram Veeram Maha Vishnum Jwalantam Sarvatomukham Nrisimham Bheeshanam Bhadram Mrityur Mrityum Namamyaham
सनातन देव पीठ परम कल्याणकारी दिव्य स्वरूप
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु अवतरित हुए भगवान विष्णु का आधा नर और आधा सिंह उग्र रूप।
असुर हिरण्यकशिपु के वध और प्रह्लाद के अटूट विश्वास की रक्षा हेतु श्री हरि ने खंभे से यह रूप धारण किया था। यह स्वरूप शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का तुरंत नाश करता है।
गरुड़
तीक्ष्ण नख (नाखून), गदा, चक्र
नृसिंह जयंती, वैशाख शुक्ल चतुर्दशी
Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.