भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 1

अर्जुन उवाच ।
मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्जितम् ।
यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥११-१॥

arjuna uvāca | madanugrahāya paramaṁ guhyamadhyātmasañjitam | yattvayoktaṁ vacastena moho'yaṁ vigato mama || 11-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2387
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 2

भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया ।
त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम् ॥११-२॥

bhavāpyayau hi bhūtānāṁ śrutau vistaraśo mayā | tvattaḥ kamalapatrākṣa māhātmyamapi cāvyayam || 11-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2430
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 3

एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर ।
द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥११-३॥

evametadyathāttha tvamātmānaṁ parameśvara | draṣṭumicchāmi te rūpamaiśvaraṁ puruṣottama || 11-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2473
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 4

मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो ।
योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥११-४॥

manyase yadi tacchakyaṁ mayā draṣṭumiti prabho | yogeśvara tato me tvaṁ darśayātmānamavyayam || 11-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2516
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 4 के पश्चात चिंतन
2559
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 5

श्रीभगवानुवाच ।
पश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोऽथ सहस्रशः ।
नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णाकृतीनि च ॥११-५॥

śrībhagavānuvāca | paśya me pārtha rūpāṇi śataśo'tha sahasraśaḥ | nānāvidhāni divyāni nānāvarṇākṛtīni ca || 11-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2602
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 6

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा ।
बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥११-६॥

paśyādityānvasūnrudrānaśvinau marutastathā | bahūnyadṛṣṭapūrvāṇi paśyāścaryāṇi bhārata || 11-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2645
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 7

इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् ।
मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि ॥११-७॥

ihaikasthaṁ jagatkṛtsnaṁ paśyādya sacarācaram | mama dehe guḍākeśa yaccānyaddraṣṭumicchasi || 11-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2688
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 8

न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा ।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ॥११-८॥

na tu māṁ śakyase draṣṭumanenaiva svacakṣuṣā | divyaṁ dadāmi te cakṣuḥ paśya me yogamaiśvaram || 11-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2731
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 8 के पश्चात चिंतन
2774
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 9

सञ्जय उवाच ।
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः ।
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥११-९॥

sañjaya uvāca | evamuktvā tato rājanmahāyogeśvaro hariḥ | darśayāmāsa pārthāya paramaṁ rūpamaiśvaram || 11-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2817
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 10

अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम् ।
अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ॥११-१०॥

anekavaktranayanamanekādbhutadarśanam | anekadivyābharaṇaṁ divyānekodyatāyudham || 11-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2860
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 11

दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् ।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ॥११-११॥

divyamālyāmbaradharaṁ divyagandhānulepanam | sarvāścaryamayaṁ devamanantaṁ viśvatomukham || 11-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2903
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 12

दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता ।
यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः ॥११-१२॥

divi sūryasahasrasya bhavedyugapadutthitā | yadi bhāḥ sadṛśī sā syādbhāsastasya mahātmanaḥ || 11-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2946
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 13

तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा ।
अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा ॥११-१३॥

tatraikasthaṁ jagatkṛtsnaṁ pravibhaktamanekadhā | apaśyaddevadevasya śarīre pāṇḍavastadā || 11-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2989
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 14

ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः ।
प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत ॥११-१४॥

tataḥ sa vismayāviṣṭo hṛṣṭaromā dhanañjayaḥ | praṇamya śirasā devaṁ kṛtāñjalirabhāṣata || 11-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

532
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 15

अर्जुन उवाच ।
पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान् ।
ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान् ॥११-१५॥

arjuna uvāca | paśyāmi devāṁstava deva dehe sarvāṁstathā bhūtaviśeṣasaṅghān | brahmāṇamīśaṁ kamalāsanasthamṛṣīṁśca sarvānuragāṁśca divyān || 11-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

575
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 16

अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रं पश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम् ।
नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं पश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप ॥११-१६॥

anekabāhūdaravaktranetraṁ paśyāmi tvāṁ sarvato'nantarūpam | nāntaṁ na madhyaṁ na punastavādiṁ paśyāmi viśveśvara viśvarūpa || 11-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

618
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 17

किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोरराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम् ।
पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम् ॥११-१७॥

kirīṭinaṁ gadinaṁ cakriṇaṁ ca tejorāśiṁ sarvato dīptimantam | paśyāmi tvāṁ durnirīkṣyaṁ samantāddīptānalārkadyutimaprameyam || 11-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

661
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 18

त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् ।
त्वमव्ययः शाश्वतधर्मगोप्ता सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे ॥११-१८॥

tvamakṣaraṁ paramaṁ veditavyaṁ tvamasya viśvasya paraṁ nidhānam | tvamavyayaḥ śāśvatadharmagoptā sanātanastvaṁ puruṣo mato me || 11-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

704
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 19

अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्यमनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम् ।
पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रं स्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम् ॥११-१९॥

anādimadhyāntamanantavīryamanantabāhuṁ śaśisūryanetram | paśyāmi tvāṁ dīptahutāśavaktraṁ svatejasā viśvamidaṁ tapantam || 11-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

747
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 19 के पश्चात चिंतन
790
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 20

द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः ।
दृष्ट्वाद्भुतं रूपमुग्रं तवेदं लोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन् ॥११-२०॥

dyāvāpṛthivyoridamantaraṁ hi vyāptaṁ tvayaikena diśaśca sarvāḥ | dṛṣṭvādbhutaṁ rūpamugraṁ tavedaṁ lokatrayaṁ pravyathitaṁ mahātman || 11-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

833
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 21

अमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति ।
स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्क marbleाभिः ॥११-२१॥

amī hi tvāṁ surasaṅghā viśanti kecidbhītāḥ prāñjalayo gṛṇanti | svastītyuktvā maharṣisiddhasaṅghāḥ stuvanti tvāṁ stutibhiḥ puṣkalābhiḥ || 11-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

876
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 22

रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च ।
गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥११-२२॥

rudrādityā vasavo ye ca sādhyā viśve'śvinau marutaścoṣmapāśca | gandharvayakṣāsurasiddhasaṅghā vīkṣante tvāṁ vismitāścaiva sarve || 11-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

919
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 23

रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरुपादम् ।
बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम् ॥११-२३॥

rūpaṁ mahatte bahuvaktranetraṁ mahābāho bahubāhūrupādam | bahūdaraṁ bahudaṁṣṭrākarālaṁ dṛṣṭvā lokāḥ pravyathitāstathāham || 11-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

962
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 24

नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णं व्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम् ।
दृष्ट्वा हि त्वां प्रव्यथितान्तरात्मा धृतिं न विन्दामि शमं च विष्णो ॥११-२४॥

nabhaḥspṛśaṁ dīptamanekavarṇaṁ vyāttānanaṁ dīptaviśālanetram | dṛṣṭvā hi tvāṁ pravyathitāntarātmā dhṛtiṁ na vindāmi śamaṁ ca viṣṇo || 11-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1005
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 25

दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानि दृष्ट्वैव कालानलसन्निवानि ।
दिशो न जाने न लभे च शर्म प्रसीद देवेश जगन्निवास ॥११-२५॥

daṁṣṭrākarālāni ca te mukhāni dṛṣṭvaiva kālānalasannibhāni | diśo na jāne na labhe ca śarma prasīda deveśa jagannivāsa || 11-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1048
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 26

अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घैः ।
भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः ॥११-२६॥

amī ca tvāṁ dhṛtarāṣṭrasya putrāḥ sarve sahaivāvanipālasaṅghaiḥ | bhīṣmo droṇaḥ sūtaputrastathāsau sahāsmadīyairapi yodhamukhyaiḥ || 11-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1091
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 27

वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि ।
केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु सन्दृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः ॥११-२७॥

vaktrāṇi te tvaramāṇā viśanti daṁṣṭrākarālāni bhayānakāni | kecidvilagnā daśanāntareṣu sandṛśyante cūrṇitairuttamāṅgaiḥ || 11-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1134
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 28

यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति ।
तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति ॥११-२८॥

yathā nadīnāṁ bahavo'mbuvegāḥ samudramevābhimukhā dravanti | tathā tavāmī naralokavīrā viśanti vaktrāṇyabhivijvalanti || 11-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1177
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 29

यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः ।
तथैव नाशाय विशन्ति लोकास्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः ॥११-२९॥

yathā pradīptaṁ jvalanaṁ pataṅgā viśanti nāśāya samṛddhavegāḥ | tathaiva nāśāya viśanti lokāstavāpi vaktrāṇi samṛddhavegāḥ || 11-29 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1220
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 30

लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ताल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः ।
तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं भासस्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो ॥११-३०॥

lelihyase grasamānaḥ samantāllokānsamagrānvadanairjvaladbhiḥ | tejobhirāpūrya jagatsamagraṁ bhāsastavogrāḥ pratapanti viṣṇo || 11-30 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1263
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 31

आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद ।
विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम् ॥११-३१॥

ākhyāhi me ko bhavānugrarūpo namo'stu te devavara prasīda | vijñātumicchāmi bhavantamādyaṁ na hi prajānāmi tava pravṛttim || 11-31 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1306
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 31 के पश्चात चिंतन
1349
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 32

श्रीभगवानुवाच ।
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः ।
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः ॥११-३२॥

śrībhagavānuvāca | kālo'smi lokakṣayakṛtpravṛddho lokānsamāhartumiha pravṛttaḥ | ṛte'pi tvāṁ na bhaviṣyanti sarve ye'vasthitāḥ pratyanīkeṣu yodhāḥ || 11-32 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1392
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 33

तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून्भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम् ।
मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन् ॥११-३३॥

tasmāttvamuttiṣṭha yaśo labhasva jitvā śatrūnbhuṅkṣva rājyaṁ samṛddham | mayaivaite nihatāḥ pūrvameva nimittamātraṁ bhava savyasācin || 11-33 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1435
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 34

द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान् ।
मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान् ॥११-३४॥

droṇaṁ ca bhīṣmaṁ ca jayadrathaṁ ca karṇaṁ tathānyānapi yodhavīrān | mayā hatāṁstvaṁ jahi mā vyathiṣṭhā yudhyasva jetāsi raṇe sapatnān || 11-34 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1478
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 34 के पश्चात चिंतन
1521
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 35

सञ्जय उवाच ।
एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटी ।
नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य ॥११-३५॥

sañjaya uvāca | etacchrutvā vacanaṁ keśavasya kṛtāñjalirvepamānaḥ kirīṭī | namaskṛtvā bhūya evāha kṛṣṇaṁ sagadgadaṁ bhītabhītaḥ praṇamya || 11-35 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1564
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 36

अर्जुन उवाच ।
स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च ।
रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसङ्घाः ॥११-३६॥

arjuna uvāca | sthāne hṛṣīkeśa tava prakīrtyā jagatprahṛṣyatyanurajyate ca | rakṣāṁsi bhītāni diśo dravanti sarve namasyanti ca siddhasaṅghāḥ || 11-36 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1607
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 37

कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन् गरीयसे ब्रह्मणोऽप्यादिकर्त्रे ।
अनन्त देवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत् ॥११-३७॥

kasmācca te na nameranmahātman garīyase brahmaṇo'pyādikartre | ananta deveśa jagannivāsa tvamakṣaraṁ sadasattatparaṁ yat || 11-37 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1650
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 38

त्वमादिदेवः पुरुषः पुराणस्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् ।
वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूप ॥११-३८॥

tvamādidevaḥ puruṣaḥ purāṇastvamasya viśvasya paraṁ nidhānam | vettāsi vedyaṁ ca paraṁ ca dhāma tvayā tataṁ viśvamanantarūpa || 11-38 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1693
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 39

वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च ।
नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥११-३९॥

vāyuryamo'gnirvaruṇaḥ śaśāṅkaḥ prajāpatistvaṁ prapitāmahaśca | namo namaste'stu sahasrakṛtvaḥ punaśca bhūyo'pi namo namaste || 11-39 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1736
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 40

नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व ।
अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥११-४०॥

namaḥ purastādatha pṛṣṭhataste namo'stu te sarvata eva sarva | anantavīryāmitavikramastvaṁ sarvaṁ samāpnoṣi tato'si sarvaḥ || 11-40 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1779
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 41

सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं हे कृष्ण हे यादव हे सखेति ।
अजानता महिमानं तवेदं मया प्रमादात्प्रणयेन वापि ॥११-४१॥

sakheti matvā prasabhaṁ yaduktaṁ he kṛṣṇa he yādava he sakheti | ajānatā mahimānaṁ tavedaṁ mayā pramādātpraṇayena vāpi || 11-41 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1822
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 42

यच्चावहासार्थमसत्कृतोऽसि विहारशय्यासनभोजनेषु ।
एकोऽथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम् ॥११-४२॥

yaccāvahāsārthamasatkṛto'si vihāraśayyāsanabhojaneṣu | eko'thavāpyacyuta tatsamakṣaṁ tatkṣāmaye tvāmahamaprameyam || 11-42 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1865
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 43

पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्च गुरुर्गरीयान् ।
न त्वत्समोऽस्त्यभ्यधिकः कुतोऽन्यो लोकत्रयेऽप्यप्रतिप्रभाव ॥११-४३॥

pitāsi lokasya carācarasya tvamasya pūjyaśca gururgarīyān | na tvatsamo'styabhyadhikaḥ kuto'nyo lokatraye'pyapratimaprabhāva || 11-43 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1908
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 44

तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय कायं प्रसादये त्वामहमीशमीड्यम् ।
पितेव पुत्रस्य सखेव सख्युः प्रियः प्रियायार्हसि देव सोढुम् ॥११-४४॥

tasmātpraṇamya praṇidhāya kāyaṁ prasādaye tvāmahamīśamīḍyam | piteva putrasya sakheva sakhyuḥ priyaḥ priyāyārhasi deva soḍhum || 11-44 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1951
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 45

अदृष्टपूर्वं हृषितोऽस्मि दृष्ट्वा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे ।
तदेव मे दर्शय देव रूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास ॥११-४५॥

adṛṣṭapūrvaṁ hṛṣito'smi dṛṣṭvā bhayena ca pravyathitaṁ mano me | tadeva me darśaya deva rūpaṁ prasīda deveśa jagannivāsa || 11-45 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1994
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 46

किरीटिनं गदिनं चक्रहस्तमिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव ।
तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते ॥११-४६॥

kirīṭinaṁ gadinaṁ cakrahastamicchāmi tvāṁ draṣṭumahaṁ tathaiva | tenaiva rūpeṇa caturbhujena sahasrabāho bhava viśvamūrte || 11-46 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2037
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 46 के पश्चात चिंतन
2080
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 47

श्रीभगवानुवाच ।
मया प्रसन्नेन तवार्जुनेदं रूपं परं दर्शितमात्मयोगात् ।
तेजोमयं विश्वमनन्तमाद्यं यन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम् ॥११-४७॥

śrībhagavānuvāca | mayā prasannena tavārjunedaṁ rūpaṁ paraṁ darśitamātmayogāt | tejomayaṁ viśvamanantamādyaṁ yanme tvadanyena na dṛṣṭapūrvam || 11-47 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2123
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 48

न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानैर्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः ।
एवंरूपः शक्य अहं नृलोके द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर ॥११-४८॥

na vedayajñādhyayanairna dānairna ca kriyābhirna tapobhirugraiḥ | evaṁrūpaḥ śakya ahaṁ nṛloke draṣṭuṁ tvadanyena kurupravīra || 11-48 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2166
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 49

मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम् ।
व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य ॥११-४९॥

mā te vyathā mā ca vimūḍhabhāvo dṛṣṭvā rūpaṁ ghoramīdṛṅmamedam | vyapetabhīḥ prītamanāḥ punastvaṁ tadeva me rūpamidaṁ prapaśya || 11-49 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2209
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 50

सञ्जय उवाच ।
इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः ।
आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा ॥११-५०॥

sañjaya uvāca | ityārjunaṁ vāsudevastathoktvā svakaṁ rūpaṁ darśayāmāsa bhūyaḥ | āśvāsayāmāsa ca bhītamenaṁ bhūtvā punaḥ saumyavapurmahātmā || 11-50 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2252
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 51

अर्जुन उवाच ।
दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तव सौम्यं जनार्दन ।
इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः ॥११-५१॥

arjuna uvāca | dṛṣṭvedaṁ mānuṣaṁ rūpaṁ tava saumyaṁ janārdana | idānīmasmi saṁvṛttaḥ sacetāḥ prakṛtiṁ gataḥ || 11-51 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2295
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 52

श्रीभगवानुवाच ।
सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम ।
देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाङ्क्षिणः ॥११-५२॥

śrībhagavānuvāca | sudurdarśamidaṁ rūpaṁ dṛṣṭavānasi yanmama | devā apyasya rūpasya nityaṁ darśanakāṅkṣiṇaḥ || 11-52 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2338
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 53

नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया ।
शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा ॥११-५३॥

nāhaṁ vedairna tapasā na dānena na cejyayā | śakya evaṁvidho draṣṭuṁ dṛṣṭavānasi māṁ yathā || 11-53 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2381
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 54

भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन ।
ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्त्वेन प्रवेष्टुं च परन्तप ॥११-५४॥

bhaktyā tvananyayā śakya ahamevaṁvidho'rjuna | jñātuṁ draṣṭuṁ ca tattvena praveṣṭuṁ ca parantapa || 11-54 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2424
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 55

मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः ।
निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव ॥११-५५॥

matkarmakṛnmatparamo madbhaktaḥ saṅgavarjitaḥ | nirvairaḥ sarvabhūteṣu yaḥ sa māmeti pāṇḍava || 11-55 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2467
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 55 के पश्चात चिंतन
2510
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 11 • श्लोक क्रमांक 56

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
विश्वरूपदर्शनयोगो नाम एकादशोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde viśvarūpadarśanayogo nāma ekādaśo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2553
Daily Gita Sadhana

Listen to One Sacred Verse Daily & Practice in Life

Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्