भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 1

अर्जुन उवाच ।
एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते ।
ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥१२-१॥

arjuna uvāca | evaṁ satatayuktā ye bhaktāstvāṁ paryupāsate | ye cāpyakṣaramavyaktaṁ teṣāṁ ke yogavittamāḥ || 12-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2596
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 2

श्रीभगवानुवाच ।
मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते ।
श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः ॥१२-२॥

śrībhagavānuvāca | mayyāveśya mano ye māṁ nityayuktā upāsate | śraddhayā parayopetāste me yuktatamā matāḥ || 12-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2639
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 2 के पश्चात चिंतन
2682
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 3

ये त्वक्षरमनिर्देश्यमव्यक्तं पर्युपासते ।
सर्वत्रगमचिन्त्यञ्च कूटस्थमचलन्ध्रुवम् ॥१२-३॥

ye tvakṣaramanirdeśyamavyaktaṁ paryupāsate | sarvatragamacintyañca kūṭasthamacalandhruvam || 12-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2725
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 4

सन्नियम्येन्द्रियग्रामं सर्वत्र समबुद्धयः ।
ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः ॥१२-४॥

sanniyamyendriyagrāmaṁ sarvatra samabuddhayaḥ | te prāpnuvanti māmeva sarvabhūtahite ratāḥ || 12-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2768
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 5

क्लेशोऽधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम् ।
अव्यक्ता हि गतिर्दुःखं देहवद्भिरवाप्यते ॥१२-५॥

kleśo'dhikatarasteṣāmavyaktāsaktacetasām | avyaktā hi gatirduḥkhaṁ dehavadbhiravāpyate || 12-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2811
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 5 के पश्चात चिंतन
2854
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 6

ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः ।
अनन्थेनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते ॥१२-६॥

ye tu sarvāṇi karmāṇi mayi saṁnyasya matparāḥ | ananyenaiva yogena māṁ dhyāyanta upāsate || 12-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2897
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 7

तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात् ।
भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम् ॥१२-७॥

teṣāmahaṁ samuddhartā mṛtyusaṁsārasāgarāt | bhavāmi nacirātpārtha mayyāveśitacetasām || 12-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2940
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 8

मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय ।
निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥१२-८॥

mayyeva mana ādhatsva mayi buddhiṁ niveśaya | nivasiṣyasi mayyeva ata ūrdhvaṁ na saṁśayaḥ || 12-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2983
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 8 के पश्चात चिंतन
526
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 9

अथ चित्तं समाधातुं न शक्नोषि मयि स्थिरम् ।
अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय ॥१२-९॥

atha cittaṁ samādhātuṁ na śaknoṣi mayi sthiram | abhyāsayogena tato māmicchāptuṁ dhanañjaya || 12-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

569
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 10

अभ्यासेऽप्यसमर्थोऽसि मत्कर्मपरमो भव ।
मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि ॥१२-१०॥

abhyāse'pyasamartho'si matkarmaparamo bhava | madarthamapi karmāṇi kurvansiddhimavāpsyasi || 12-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

612
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 11

अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रितः ।
सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान् ॥१२-११॥

athaitadpyaśakto'si kartuṁ madyogamāśritaḥ | sarvakarmaphalatyāgaṁ tataḥ kuru yatātmavān || 12-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

655
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 12

श्रेयो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानाद्ध्यानं विशिष्यते ।
ध्यानात्कर्मफलत्यागस्त्यागाच्छान्तिरनन्तरम् ॥१२-१२॥

śreyo hi jñānamabhyāsājjñānāddhyānaṁ viśiṣyate | dhyānātkarmaphalatyāgastyāgācchāntiranantaram || 12-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

698
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 12 के पश्चात चिंतन
741
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 13

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च ।
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥१२-१३॥

adveṣṭā sarvabhūtānāṁ maitraḥ karuṇa eva ca | nirmamo nirahaṅkāraḥ samaduḥkhasukhaḥ kṣamī || 12-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

784
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 14

सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः ।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥१२-१४॥

santuṣṭaḥ satataṁ yogī yatātmā dṛḍhaniścayaḥ | mayyarpitamanobuddhiryo madbhaktaḥ sa me priyaḥ || 12-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

827
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 15

यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः ।
हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रियः ॥१२-१५॥

yasmānnodvijate loko lokānnodvijate ca yaḥ | harṣāmarṣabhayodvegairmukto yaḥ sa ca me priyaḥ || 12-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

870
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 16

अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः ।
सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥१२-१६॥

anapekṣaḥ śucirdakṣa udāsīno gatavyathaḥ | sarvārambhaparityāgī yo madbhaktaḥ sa me priyaḥ || 12-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

913
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 17

यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति ।
शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः ॥१२-१७॥

yo na hṛṣyati na dveṣṭi na śocati na kāṅkṣati | śubhāśubhaparityāgī bhaktimānyaḥ sa me priyaḥ || 12-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

956
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 18

समः शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयोः ।
शीतोष्णसुखदुःखेषु समः सङ्गविवर्जितः ॥१२-१८॥

samaḥ śatrau ca mitre ca tathā mānāpamānayoḥ | śītoṣṇasukhaduḥkheṣu samaḥ saṅgavivarjitaḥ || 12-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

999
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 19

तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित् ।
अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः ॥१२-१९॥

tulyanindāstutirmaunī santuṣṭo yena kenacit | aniketaḥ sthiramatirbhaktimānme priyo naraḥ || 12-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1042
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 20

ये तु धर्म्यामृतमिदं यथोक्तं पर्युपासते ।
श्रद्दधाना मत्परमा भक्तास्तेऽतीव मे प्रियाः ॥१२-२०॥

ye tu dharmyāmṛtamidaṁ yathoktaṁ paryupāsate | śraddadhānā matparamā bhaktāste'tīva me priyāḥ || 12-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1085
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 20 के पश्चात चिंतन
1128
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 12 • श्लोक क्रमांक 21

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
भक्तियोगो नाम द्वादशोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde bhaktiyogo nāma dvādaśo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1171
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भक्ति की सभा
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