भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 1

अर्जुन उवाच ।
प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च ।
एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव ॥१३-१॥

arjuna uvāca | prakṛtiṁ puruṣaṁ caiva kṣetraṁ kṣetrajñameva ca | etadveditumicchāmi jñānaṁ jñeyaṁ ca keśava || 13-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1214
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 2

श्रीभगवानुवाच ।
इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते ।
एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः ॥१३-२॥

śrībhagavānuvāca | idaṁ śarīraṁ kaunteya kṣetramityabhidhīyate | etadyo vetti taṁ prāhuḥ kṣetrajña iti tadvidaḥ || 13-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1257
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 3

क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत ।
क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं यत्तज्ज्ञानं मतं मम ॥१३-३॥

kṣetrajñaṁ cāpi māṁ viddhi sarvakṣetreṣu bhārata | kṣetrakṣetrajñayorjñānaṁ yattajjñānaṁ mataṁ mama || 13-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1300
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 3 के पश्चात चिंतन
1343
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 4

तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च यद्विकारि यतश्च यत् ।
स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे शृणु ॥१३-४॥

tatkṣetraṁ yacca yādṛkca yadvikāri yataśca yat | sa ca yo yatprabhāvaśca tatsamāsena me śṛṇu || 13-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1386
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 5

ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधैः पृथक् ।
ब्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्चितैः ॥१३-५॥

ṛṣibhirbahudhā gītaṁ chandobhirvividhaiḥ pṛthak | brahmasūtrapadaiścaiva hetumadbhirviniścitaiḥ || 13-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1429
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 6

महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च ।
इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः ॥१३-६॥

mahābhūtānyahaṅkāro buddhiravyaktameva ca | indriyāṇi daśaikaṁ ca pañca cendriyagocarāḥ || 13-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1472
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 7

इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं सङ्घातश्चेतना धृतिः ।
एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् ॥१३-७॥

icchā dveṣaḥ sukhaṁ duḥkhaṁ saṅghātaścetanā dhṛtiḥ | etatkṣetraṁ samāsena savikāramudāhṛtam || 13-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1515
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 8

अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् ।
आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः ॥१३-८॥

amānitvamadambhitvamahiṁsā kṣāntirārjavam | ācāryopāsanaṁ śaucaṁ sthairyātmavinigrahaḥ || 13-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1558
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 9

इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहङ्कार एव च ।
जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम् ॥१३-९॥

indriyārtheṣu vairāgyamanahaṅkāra eva ca | janmamṛtyujarāvyādhiduḥkhadoṣānudarśanam || 13-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1601
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 10

असक्तिरनभिष्वङ्गः पुत्रदारगृहादिषु ।
नित्यं च समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु ॥१३-१०॥

asaktiranabhiṣvaṅgaḥ putradāragṛhādiṣu | nityaṁ ca samacittatvamiṣṭāniṣṭopapattiṣu || 13-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1644
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 11

मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी ।
विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि ॥१३-११॥

mayi cānanyayogena bhaktiravyabhicāriṇī | viviktadeśasevitvamaratirjanasaṁsadi || 13-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1687
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 12

अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम् ।
एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा ॥१३-१२॥

adhyātmajñānanityatvaṁ tattvajñānārthadarśanam | etajjñānamiti proktamajñānaṁ yadato'nyathā || 13-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1730
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 12 के पश्चात चिंतन
1773
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 13

ज्ञेयं यत्तत्प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वामृतमश्नुते ।
अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते ॥१३-१३॥

jñeyaṁ yattatpravakṣyāmi yajjñātvāmṛtamaśnute | anādimatparaṁ brahma na sattannāsaducyate || 13-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1816
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 14

सर्वतःपाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।
सर्वतःश्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ॥१३-१४॥

sarvataḥpāṇipādaṁ tatsarvato'kṣiśiromukham | sarvataḥśrutimalloke sarvamāvṛtya tiṣṭhati || 13-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1859
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 15

सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम् ।
असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च ॥१३-१५॥

sarvendriyaguṇābhāsaṁ sarvendriyavivarjitam | asaktaṁ sarvabhṛccaiva nirguṇaṁ guṇabhoktṛ ca || 13-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1902
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 16

बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च ।
सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् ॥१३-१६॥

bahirantaśca bhūtānāmacaraṁ carameva ca | sūkṣmatvāttadavijñeyaṁ dūrasthaṁ cāntike ca tat || 13-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1945
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 17

अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम् ।
भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च ॥१३-१७॥

avibhaktaṁ ca bhūteṣu vibhaktamiva ca sthitam | bhūtabhartṛ ca tajjñeyaṁ grasiṣṇu prabhaviṣṇu ca || 13-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1988
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 18

ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते ।
ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम् ॥१३-१८॥

jyotiṣāmapi tajjyotistamasaḥ paramucyate | jñānaṁ jñeyaṁ jñānagamyaṁ hṛdi sarvasya viṣṭhitam || 13-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2031
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 19

इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः ।
मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते ॥१३-१९॥

iti kṣetraṁ tathā jñānaṁ jñeyaṁ coktaṁ samāsataḥ | madbhakta etadvijñāya madbhāvāyopapadyate || 13-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2074
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 19 के पश्चात चिंतन
2117
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 20

प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्ध्यनादी उभावपि ।
विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसम्भवान् ॥१३-२०॥

prakṛtiṁ puruṣaṁ caiva viddhyanādī ubhāvapi | vikārāṁśca guṇāṁścaiva viddhi prakṛtisambhavān || 13-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2160
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 21

कार्यकारणकर्तृत्वे हेतुः प्रकृतिरुच्यते ।
पुरुषः सुखदुःखानां भोक्तृत्वे हेतुरुच्यते ॥१३-२१॥

kāryakāraṇakartṛtve hetuḥ prakṛtirucyate | puruṣaḥ sukhaduḥkhānāṁ bhoktṛtve heturucyate || 13-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2203
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 22

पुरुषः प्रकृतिस्थो हि भुङ्क्ते प्रकृतिजान्गुणान् ।
कारणं गुणसङ्गोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु ॥१३-२२॥

puruṣaḥ prakṛtistho hi bhuṅkte prakṛtijānguṇān | kāraṇaṁ guṇasaṅgo'sya sadasadyonijanmasu || 13-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2246
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 23

उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः ।
परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः ॥१३-२३॥

upadraṣṭānumantā ca bhartā bhoktā maheśvaraḥ | paramātmeti cāpyukto dehe'sminpuruṣaḥ paraḥ || 13-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2289
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 24

य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह ।
सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते ॥१३-२४॥

ya evaṁ vetti puruṣaṁ prakṛtiṁ ca guṇaiḥ saha | sarvathā vartamāno'pi na sa bhūyo'bhijāyate || 13-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2332
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 25

ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना ।
अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे ॥१३-२५॥

dhyānenātmani paśyanti kecidātmānamātmanā | anye sāṅkhyena yogena karmayogena cāpare || 13-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2375
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 26

अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्य उपासते ।
तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः ॥१३-२६॥

anye tvevamajānantaḥ śrutvānyebhya upāsate | te'pi cātitarantyeva mṛtyuṁ śrutiparāyaṇāḥ || 13-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2418
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 26 के पश्चात चिंतन
2461
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 27

यावत्सञ्जायते किञ्चित्सत्त्वं स्थावरजङ्गमम् ।
क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्धि भरतर्षभ ॥१३-२७॥

yāvatsañjāyate kiñcitsattvaṁ sthāvarajaṅgamam | kṣetrakṣetrajñasaṁyogāttadviddhi bharatarṣabha || 13-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2504
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 28

समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम् ।
विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति ॥१३-२८॥

samaṁ sarveṣu bhūteṣu tiṣṭhantaṁ parameśvaram | vinaśyatsvavinaśyantaṁ yaḥ paśyati sa paśyati || 13-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2547
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 29

समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम् ।
न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम् ॥१३-२९॥

samaṁ paśyanhi sarvatra samavasthitamīśvaram | na hinastyātmanātmānaṁ tato yāti parāṁ gatim || 13-29 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2590
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 30

प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः ।
यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥१३-३०॥

prakṛtyaiva ca karmāṇi kriyamāṇāni sarvaśaḥ | yaḥ paśyati tathātmānamakartāraṁ sa paśyati || 13-30 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2633
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 31

यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति ।
तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा ॥१३-३१॥

yadā bhūtapṛthagbhāvamekasthanupasyati | tata eva ca vistāraṁ brahma sampadyate tadā || 13-31 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2676
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 31 के पश्चात चिंतन
2719
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 32

अनादित्वान्निर्गुणत्वात्परमात्मायमव्ययः ।
शरीरस्थोऽपि कौन्तेय न करोति न लिप्यते ॥१३-३२॥

anāditvānnirguṇatvātparamātmāyamavyayaḥ | śarīrastho'pi kaunteya na karoti na lipyate || 13-32 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2762
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 33

यथा सर्वगतं सौक्ष्म्यादाकाशं नोपलिप्यते ।
सर्वत्रावस्थितो देहे तथात्मा नोपलिप्यते ॥१३-३३॥

yathā sarvagataṁ saukṣmyādākāśaṁ nopalipyate | sarvatrāvasthito dehe tathātmā nopalipyate || 13-33 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2805
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 34

यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः ।
क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ॥१३-३४॥

yathā prakāśayatyekaḥ kṛtsnaṁ lokamimaṁ raviḥ | kṣetraṁ kṣetrī tathā kṛtsnaṁ prakāśayati bhārata || 13-34 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2848
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 35

क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुषा ।
भूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर्यान्ति ते परम् ॥१३-३५॥

kṣetrakṣetrajñayorevamantaraṁ jñānacakṣuṣā | bhūtaprakṛtimokṣaṁ ca ye viduryānti te param || 13-35 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2891
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 35 के पश्चात चिंतन
2934
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 13 • श्लोक क्रमांक 36

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
प्रकृतिपुरुषविवेकयोगो नाम त्रयोदशोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde prakṛtipuruṣavivekayogo nāma trayodaśo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2977
Daily Gita Sadhana

Listen to One Sacred Verse Daily & Practice in Life

Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्