भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 1

श्रीभगवानुवाच ।
परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् ।
यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥१४-१॥

śrībhagavānuvāca | paraṁ bhūyaḥ pravakṣyāmi jñānānāṁ jñānamuttamam | yajjñātvā munayaḥ sarve parāṁ siddhimito gatāḥ || 14-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

520
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 2

इदं ज्ञानमुपाश्रित्य मम साधर्म्यमागताः ।
सर्गेऽपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च ॥१४-२॥

idaṁ jñānamupāśritya mama sādharmyamāgatāḥ | sarge'pi nopajāyante pralaye na vyathanti ca || 14-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

563
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 2 के पश्चात चिंतन
606
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 3

मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् ।
सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥१४-३॥

mama yonirmahadbrahma tasmingarbhaṁ dadhāmyaham | sambhavaḥ sarvabhūtānāṁ tato bhavati bhārata || 14-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

649
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 4

सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः ।
तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ॥१४-४॥

sarvayoniṣu kaunteya mūrtayaḥ sambhavanti yāḥ | tāsāṁ brahma mahadyonirahaṁ bījapradaḥ pitā || 14-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

692
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 5

सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः ।
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥१४-५॥

sattvaṁ rajastama iti guṇāḥ prakṛtisambhavāḥ | nibadhnanti mahābāho dehe dehinamavyayam || 14-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

735
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 6

तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् ।
सुखसङ्गेन बध्नाति ज्ञानसङ्गेन चानघ ॥१४-६॥

tatra sattvaṁ nirmalatvātprakāśakamanāmayam | sukhasaṅgena badhnāti jñānasaṅgena cānagha || 14-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

778
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 7

रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम् ।
तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम् ॥१४-७॥

rajo rāgātmakaṁ viddhi tṛṣṇāsaṅgasamudbhavam | tannibadhnāti kaunteya karmasaṅgena dehinam || 14-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

821
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 8

तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम् ।
प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥१४-८॥

tamastvajñānajaṁ viddhi mohanaṁ sarvadehinām | pramādālasyanidrābhistannibadhnāti bhārata || 14-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

864
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 9

सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत ।
ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे सञ्जयत्युत ॥१४-९॥

sattvaṁ sukhe sañjayati rajaḥ karmaṇi bhārata | jñānamāvṛtya tu tamaḥ pramāde sañjayatyuta || 14-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

907
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 10

रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत ।
रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा ॥१४-१०॥

rajastamaścābhibhūya sattvaṁ bhavati bhārata | rajaḥ sattvaṁ tamaścaiva tamaḥ sattvaṁ rajastathā || 14-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

950
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 10 के पश्चात चिंतन
993
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 11

सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते ।
ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥१४-११॥

sarvadvāreṣu dehe'sminprakāśa upajāyate | jñānaṁ yadā tadā vidyādvivṛddhaṁ sattvamityuta || 14-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1036
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 12

लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृह ।
रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ ॥१४-१२॥

lobhaḥ pravṛttirārambhaḥ karmaṇāmaśamaḥ spṛhā | rajasyetāni jāyante vivṛddhe bharatarṣabha || 14-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1079
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 13

अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च ।
तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥१४-१३॥

aprakāśo'pravṛttiśca pramādo moha eva ca | tamasyetāni jāyante vivṛddhe kurunandana || 14-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1122
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 14

यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् ।
तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥१४-१४॥

yadā sattve pravṛddhe tu pralayaṁ yāti dehabhṛt | tadottamavidāṁ lokānamalānpratipadyate || 14-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1165
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 15

रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते ।
तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ॥१४-१५॥

rajasi pralayaṁ gatvā karmasaṅgiṣu jāyate | tathā pralīnastamasi mūḍhayoniṣu jāyate || 14-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1208
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 15 के पश्चात चिंतन
1251
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 16

कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम् ।
रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् ॥१४-१६॥

karmaṇaḥ sukṛtasyāhuḥ sāttvikaṁ nirmalaṁ phalam | rajasastu phalaṁ duḥkhamajñānaṁ tamasaḥ phalam || 14-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1294
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 17

सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च ।
प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च ॥१४-१७॥

sattvātsañjāyate jñānaṁ rajaso lobha eva ca | pramādamohau tamaso bhavato'jñānameva ca || 14-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1337
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 18

ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः ।
जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥१४-१८॥

ūrdhvaṁ gacchanti sattvasthā madhye tiṣṭhanti rājasāḥ | jaghanyaguṇavṛttisthā adho gacchanti tāmasāḥ || 14-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1380
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 19

नान्यं गुणेभ्यः कर्तारं यदा द्रष्टानुपश्यति ।
गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति ॥१४-१९॥

nānyaṁ guṇebhyaḥ kartāraṁ yadā draṣṭānupaśyati | guṇebhyaśca paraṁ vetti madbhāvaṁ so'dhigacchati || 14-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1423
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 20

गुणानतान्तीत्य त्रीन्देही देहसमुद्भवान् ।
जन्ममृत्युजरादुःखैर्विमुक्तोऽमृतमश्नुते ॥१४-२०॥

guṇānetānatītya trīndehī dehasamudbhavān | janmamṛtyujarāduḥkhairvimukto'mṛtamaśnute || 14-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1466
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 20 के पश्चात चिंतन
1509
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 21

अर्जुन उवाच ।
कैर्लिङ्गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो ।
किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ॥१४-२१॥

arjuna uvāca | kairliṅgaistrīnguṇānetānatīto bhavati prabho | kimācāraḥ kathaṁ caitāṁstrīnguṇānativartate || 14-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1552
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 22

श्रीभगवानुवाच ।
प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव ।
न द्वेष्टि सम्प्रवृत्तानि न निवृत्तानि काङ्क्षति ॥१४-२२॥

śrībhagavānuvāca | prakāśaṁ ca pravṛttiṁ ca mohameva ca pāṇḍava | na dveṣṭi sampravṛttāni na nivṛttāni kāṅkṣati || 14-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1595
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 23

उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते ।
गुणा वर्तन्त इत्येवं योऽवतिष्ठति नेङ्गते ॥१४-२३॥

udāsīnavadāsīno guṇairyo na vicālyate | guṇā vartanta ityevaṁ yo'vatiṣṭhati neṅgate || 14-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1638
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 24

समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः ।
तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः ॥१४-२४॥

samaduḥkhasukhaḥ svasthaḥ samaloṣṭāśmakāñcanaḥ | tulyapriyāpriyo dhīrastulyanindātmasaṁstutiḥ || 14-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1681
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 25

मानापमानयोस्तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः ।
सर्वारम्भपरित्यागी गुणातीतः स उच्यते ॥१४-२५॥

mānāpamānayostulyastulyo mitrāripakṣayoḥ | sarvārambhaparityāgī guṇātītaḥ sa ucyate || 14-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1724
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 26

मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते ।
स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥१४-२६॥

māṁ ca yo'vyabhicāreṇa bhaktiyogena sevate | sa guṇānsamatītyaitānbrahmabhūyāya kalpate || 14-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1767
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 27

ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहममृतस्याव्ययस्य च ।
शाश्वतस्य च धर्मस्य सुखस्यैकान्तिकस्य च ॥१४-२७॥

brahmaṇo hi pratiṣṭhāhamamṛtasyāvyayasya ca | śāśvatasya ca dharmasya sukhasyaikāntikasya ca || 14-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1810
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 27 के पश्चात चिंतन
1853
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 14 • श्लोक क्रमांक 28

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
गुणत्रयविभागयोगो नाम चतुर्दशोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde guṇatrayavibhāgayogo nāma caturdaśo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1896
Daily Gita Sadhana

Listen to One Sacred Verse Daily & Practice in Life

Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्