भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 1

श्रीभगवानुवाच ।
ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् ।
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ॥१५-१॥

śrībhagavānuvāca | ūrdhvamūlamadhaḥśākham aśvatthaṁ prāhuravyayam | chandāṁsi yasya parṇāni yastaṁ veda sa vedavit || 15-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1939
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 2

अधश्चोर्ध्वं प्रसृतास्तस्य शाखा गुणप्रवृद्धा विषयप्रवालाः ।
अधश्च मूलान्यनुसन्ततानि कर्मानुबन्धीनि मनुष्यलोके ॥१५-२॥

adhaścordhvaṁ prasṛtāstasya śākhā guṇapravṛddhā viṣayapravālāḥ | adhaśca mūlānyanusantatāni karmānubandhīni manuṣyaloke || 15-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1982
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 3

न रूपमस्येह तथोपलभ्यते न तो न चादिर््न च सम्प्रतिष्ठा ।
अश्वत्थमेनं सुविरूढमूलमअसङ्गशस्त्रेण दृढेन छित्त्वा ॥१५-३॥

na rūpamasyeha tathopalabhyate nānto na cādirna ca sampratiṣṭhā | aśvatthamenaṁ suvirūḍhamūlamasaṅgaśastreṇa dṛḍhena chittvā || 15-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2025
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 4

ततः पदं तत्परिमार्गितव्यं यस्मिन्गता नावर्तanti भूयः ।
तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये यतः प्रवृत्तिः प्रसृता पुराणी ॥१५-४॥

tataḥ padaṁ tatparimārgitavyaṁ yasmingatā nāvartanti bhūyaḥ | tameva cādyaṁ puruṣaṁ prapadye yataḥ pravṛttiḥ prasṛtā purāṇī || 15-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2068
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 4 के पश्चात चिंतन
2111
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 5

निर्मानमोहा जितसङ्गदोषा अध्यात्मनित्या विनिवृत्तकामाः ।
द्वन्द्वैर्विमुक्ताः सुखदुःखसंज्ञैर्गच्छन्त्यमूढाः পদमव्ययं तत् ॥१५-५॥

nirmānamohā jitasaṅgadoṣā adhyātmanityā vinivṛttakāmāḥ | dvandvairvimuktāḥ sukhaduḥkhasaṁjñairgacchantyamūḍhāḥ padamavyayaṁ tat || 15-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2154
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 6

न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः ।
यद्गत्वा नावर्तते तद्धाम परमं मम ॥१५-६॥

na tadbhāsayate sūryo na śaśāṅko na pāvakaḥ | yadgatvā nāvartate taddhāma paramaṁ mama || 15-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2197
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 7

ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः ।
मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानी कर्षति ॥१५-७॥

mamaivāṁśo jīvaloke jīvabhūtaḥ sanātanaḥ | manaḥṣaṣṭhānīndriyāṇi prakṛtisthāni karṣati || 15-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2240
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 8

शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः ।
गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् ॥१५-८॥

śarīraṁ yadavāpnoti yaccāpyutkrāmatīśvaraḥ | gṛhītvaitāni saṁyāti vāyurgandhānivāśayāt || 15-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2283
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 8 के पश्चात चिंतन
2326
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 9

श्रोत्रं चक्षُः स्पर्शनं च रसनं घ्राणमेव च ।
अधिष्ठाय मनश्चायं विषयानुपसेवते ॥१५-९॥

śrotraṁ cakṣuḥ sparśanaṁ ca rasanaṁ ghrāṇameva_ca | adhiṣṭhāya manaścāyaṁ viṣayānupasevate || 15-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2369
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 10

उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुञ्जानं वा गुणान्वितम् ।
विमूढा नानुपश्यन्ति पश्यन्ति ज्ञानचक्षुषः ॥१५-१०॥

utkrāmantaṁ sthitaṁ vāpi bhuñjānaṁ vā guṇānvitam | vimūḍhā nānupaśyanti paśyanti jñānacakṣuṣaḥ || 15-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2412
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 11

यतन्तो योगिनश्चैनं पश्यन्त्यात्मन्यवस्थितम् ।
यतन्तोऽप्यकृतात्मानो नैनं पश्यन्त्यचेतसः ॥१५-११॥

yatanto yoginaścainaṁ paśyantyātmanyavasthitam | yatanto'pyakṛtātmāno nainaṁ paśyantyacetasaḥ || 15-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2455
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 11 के पश्चात चिंतन
2498
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 12

यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम् ।
यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम् ॥१५-१२॥

yadādityagataṁ tejo jagadbhāsayate'khilam | yaccandramasi yaccāgnau tattejo viddhi māmakam || 15-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2541
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 13

गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा ।
पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः ॥१५-१३॥

gāmāviśya ca bhūtāni dhārayāmyahamojassa | puṣṇāmi cauṣadhīḥ sarvāḥ somo bhūtvā rasātmakaḥ || 15-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2584
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 14

अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः ।
प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम् ॥१५-१४॥

ahaṁ vaiśvānaro bhūtvā prāṇināṁ dehamāśritaḥ | prāṇāpānasamāyuktaḥ pacāmyannaṁ caturvidham || 15-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2627
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 15

सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तस्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च ।
वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम् ॥१५-१५॥

sarvasya cahaṁ hṛdi sanniviṣṭo mattasmṛtirjñānamapohanaṁ ca | vedaiśca sarvairahameva vedyo vedāntakṛdvedavideva cāham || 15-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2670
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 15 के पश्चात चिंतन
2713
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 16

द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च ।
क्षरः सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते ॥१५-१६॥

dvāvimau puruṣau loke kṣaraścākṣara eva ca | kṣaraḥ sarvāṇi bhūtāni kūṭastho'kṣara ucyate || 15-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2756
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 17

उत्तमः पुरुषस्त्वन्यः परमात्माउदाहृतः ।
यो लोकत्रयमाविश्य बिभर्त्यव्यय ईश्वरः ॥१५-१७॥

uttamaḥ puruṣastvanyaḥ paramātmātyudāhṛtaḥ | yo lokatrayamāviśya bibhartyavyaya īśvaraḥ || 15-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2799
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 18

यस्मात्क्षरमतीतोऽहमक्षरादपि चोत्तमः ।
अतोऽस्मि लोके वेदे च प्रथितः पुरुषोत्तमः ॥१५-१८॥

yasmātkṣaramatīto'hamakṣarādapi cottamaḥ | ato'smi loke vede ca prathitaḥ puruṣottamaḥ || 15-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2842
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 19

यो मामేవमसंमूढो जानाति पुरुषोत्तमम् ।
स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत ॥१५-१९॥

yo māmevamasammūḍho jānāti puruṣottamam | sa sarvavidbhajati māṁ sarvabhāvena bhārata || 15-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2885
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 20

इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ ।
एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ॥१५-२०॥

iti guhyatamaṁ śāstramiduktaṁ mayānagha | etadbuddhvā buddhimānsyāt kṛtakṛtyaśca bhārata || 15-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2928
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 20 के पश्चात चिंतन
2971
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 15 • श्लोक क्रमांक 21

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
पुरुषोत्तमयोगो नाम पञ्चदशोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde puruṣottamayogo nagma pañcadaśo'dhyāyaḥ ॥

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

514
Daily Gita Sadhana

Listen to One Sacred Verse Daily & Practice in Life

Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्