भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 1

अर्जुन उवाच ।
ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः ।
तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः ॥१७-१॥

arjuna uvāca | ye śāstravidhimutsṛjya yajante śraddhayānvitāḥ | teṣāṁ niṣṭhā tu kā kṛṣṇa sattvamāho rajastamaḥ || 17-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1847
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 2

श्रीभगवानुवाच ।
त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा ।
सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु ॥१७-२॥

śrībhagavānuvāca | trividhā bhavati śraddhā dehināṁ sā svabhāvajā | sāttvikī rājasī caiva tāmasī ceti tāṁ śṛṇu || 17-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1890
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 3

सत्त्वानुरूपा सर्वस्य श्रद्धा भवति भारत ।
श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्धः स एव सः ॥१७-३॥

sattvānurūpā sarvasya śraddhā bhavati bhārata | śraddhāmayo'yaṁ puruṣo yo yacchraddhaḥ sa eva saḥ || 17-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1933
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 3 के पश्चात चिंतन
1976
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 4

यजन्ते सात्त्विका देवान्यक्षरांसि राजसाः ।
प्रेतान्भूतगणान्संश्चान्ये यजन्ते तामसा जनाः ॥१७-४॥

yajante sāttvikā devānyakṣarāṁsi rājasāḥ | pretānbhūtagaṇāṁścānye yajante tāmasā janāḥ || 17-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2019
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 5

अशास्त्रविहितं घोरं तप्यन्ते ये तपो जनाः ।
दम्भाहङ्कारसंयुक्ताः कामरागबलान्विताः ॥१७-५॥

aśāstravihitaṁ ghoraṁ tapyante ye tapo janāḥ | dambhāhaṅkārasaṁyuktāḥ kāmarāgabalānvitāḥ || 17-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2062
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 6

कर्षयन्तः शरीरस्थं भूतग्राममचेतसः ।
मां चैवान्तःशरीरस्थं तां विद्धि आसुरनिश्चयान् ॥१७-६॥

karṣayantaḥ śarīrasthaṁ bhūtagrāmamacetasaḥ | māṁ caivāntaḥśarīrasthaṁ tān viddhi āsuraniścayān || 17-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2105
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 6 के पश्चात चिंतन
2148
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 7

आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः ।
यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं शृणु ॥१७-७॥

āhārastvapi sarvasya trividho bhavati priyaḥ | yajñastapastathā dānaṁ teṣāṁ bhedamimaṁ śṛṇu || 17-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2191
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 8

आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः ।
रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाः ॥१७-८॥

āyuḥsattvabalārogyasukhaprītivivardhanāḥ | rasyāḥ snigdhāḥ sthirā hṛdyā āhārāḥ sāttvikapriyāḥ || 17-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2234
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 9

कट्ल्वलवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदारिनः ।
आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः ॥१७-९॥

kaṭvilavaṇātyuṣṇatīkṣṇarūkṣavidāriṇaḥ | āhārā rājasasyeṣṭā duḥkhaśokāmayapradāḥ || 17-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2277
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 10

यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत् ।
उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम् ॥१७-१०॥

yātayāmaṁ gatarasaṁ pūti paryuṣitaṁ ca yat | ucchiṣṭamapi cāmedhyaṁ bhojanaṁ tāmasapriyam || 17-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2320
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 10 के पश्चात चिंतन
2363
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 11

अफलाकाङ्क्षिभिर्यज्ञो विधिदृष्टो य इष्यते ।
यष्टव्यमेवेति मनः समाधाय स सात्त्विकः ॥१७-११॥

aphalākāṅkṣibhiryajño vidhidṛṣṭo ya iṣyate | yaṣṭavyameveti manaḥ samādhāya sa sāttvikaḥ || 17-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2406
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 12

अभिसन्धाय तु फलं दम्भार्थमपि चैव यत् ।
इज्यते भरतश्रेष्ठ तं यज्ञं विद्धि राजसम् ॥१७-१२॥

abhisandhāya tu phalaṁ dambhārthamapi caiva yat | ijyate bharataśreṣṭha taṁ yajñaṁ viddhi rājasam || 17-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2449
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 13

विधिहीनमसृष्टान्नं मन्त्रहीनमदक्षिणम् ।
श्रद्धया रहितं यज्ञं तामसं परिचक्षते ॥१७-१३॥

vidhihīnamasṛṣṭānnaṁ mantrahīnamadakṣiṇam | śraddhayā rahitaṁ yajñaṁ tāmasaṁ paricakṣate || 17-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2492
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 13 के पश्चात चिंतन
2535
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 14

देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम् ।
ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते ॥१७-१४॥

devadvijaguruprājñapūjanaṁ śaucamārjavam | brahmacaryamahiṁsā ca śārīraṁ tapa ucyate || 17-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2578
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 15

अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियं च यत् ।
स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्गयं तप उच्यते ॥१७-१५॥

anudvegakaraṁ vākyaṁ satyaṁ priyaṁ ca yat | svādhyāyābhyasanaṁ caiva vāṅmayaṁ tapa ucyate || 17-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2621
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 16

मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः ।
भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते ॥१७-१६॥

manaḥprasādaḥ saumyatvaṁ maunamātmavinigrahaḥ | bhāvasaṁśuddhirityetattapo mānasamucyate || 17-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2664
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 17

श्रद्धया परया तप्तं तपस्तत्त्रिविधं नरैः ।
अफलाकाङ्क्षिभिर्युक्तेः सात्त्विकं परिचक्षते ॥१७-१७॥

śraddhayā parayā taptaṁ tapastattrividhaṁ naraiḥ | aphalākāṅkṣibhiryuktaiḥ sāttvikaṁ paricakṣate || 17-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2707
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 18

सत्कारमानपूजार्थं तपो दम्भेने चैव यत् ।
क्रियते तदिह प्रोक्तं राजसं चलमध्रुवम् ॥१७-१८॥

satkāramānapūjārthaṁ tapo dambhena caiva yat | kriyate tadiha proktaṁ rājasaṁ calamadhruvam || 17-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2750
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 19

मूढग्राहणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः ।
परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम् ॥१७-१९॥

mūḍhagrāhaṇātmano yatpīḍayā kriyate tapaḥ | parasya-utsādanārthaṁ vā tattāmasamudāhṛtam || 17-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2793
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 19 के पश्चात चिंतन
2836
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 20

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे ।
देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम् ॥१७-२०॥

dātavyamiti yaddānaṁ dīyate'nupakāriṇe | deśe kāle ca pātre ca taddānaṁ sāttvikaṁ smṛtam || 17-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2879
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 21

यत्तु प्रत्युपकारार्थं फलमुद्दिश्य वा पुनः ।
दीयते च परिक्लिष्टं तद्दानं राजसं स्मृतम् ॥१७-२१॥

yattu ప్రత్యupakārārthaṁ phalamuddiśya vā punaḥ | dīyate ca parikliṣṭaṁ taddānaṁ rājasaṁ smṛtam || 17-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2922
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 22

अदेशकाले यद्दानमपात्रेभ्यश्च दीयते ।
असत्कृतमअवज्ञातं तत्तामसमुदाहृतम् ॥१७-२२॥

adeśakāle yaddānamapātrebhyaśca dīyate | asatkṛtamavajñātaṁ tattāmasamudāhṛtam || 17-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2965
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 22 के पश्चात चिंतन
508
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 23

ॐ तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः ।
ब्राह्मणাস্তेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिताः पुरा ॥१७-२३॥

oṁ tatsaditi nirdeśo brahmaṇastrividhaḥ smṛtaḥ | brāhmaṇāstena vedāśca yajñāśca vihitāḥ purā || 17-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

551
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 24

तस्मादومित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः ।
प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततम् ब्रह्मवादिनाम् ॥१७-२४॥

tasmādomityudāhṛtya yajñadānatapaḥkriyāḥ | pravartante vidhānoktāḥ satataṁ brahmavādinām || 17-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

594
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 25

तदित्यनभिसन्धाय फलं यज्ञतपःक्रियाः ।
दानक्रियाश्च विविधाः क्रियन्ते मोक्षकाङ्क्षिभिः ॥१७-२५॥

tadityanabhisandhāya phalaṁ yajñatapaḥkriyāḥ | dānakriyāśca vividhāḥ kriyante mokṣakāṅkṣibhiḥ || 17-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

637
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 26

सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते ।
प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते ॥१७-२६॥

sadbhāve sādhubhāve ca sadityetatprayujyate | praśaste karmaṇi tathā sacchabdaḥ pārtha yujyate || 17-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

680
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 27

यज्ञे तपसि दाने च स्थितिः सदिति चोच्यते ।
कर्म चैव तदर्थीयं सदित्येवाभिधीयते ॥१७-२७॥

yajñe tapasi dāne ca sthitiḥ saditi cocyate | karma caiva tadarthīyaṁ sadityevābhidhīyate || 17-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

723
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 28

अश्रद्धया हुतं दत्तं तपस्तप्तं कृतं च यत् ।
असदित्युच्यते पार्थ न च तत्प्रेत्य नो इह ॥१७-२८॥

aśraddhayā hutaṁ dattaṁ tapastaptaṁ kṛtaṁ ca yat | asadityucyate pārtha na ca tatpretya no iha || 17-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

766
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 28 के पश्चात चिंतन
809
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 17 • श्लोक क्रमांक 29

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
श्रद्धात्रयविभागयोगो नाम सप्तदशोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde śraddhātrayavibhāgayogo nāma saptadaśo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

852
Daily Gita Sadhana

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भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्