भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 1

अर्जुन उवाच ।
संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम् ।
त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन ॥१८-१॥

arjuna uvāca | saṁnyāsasya mahābāho tattvamicchāmi veditum | tyāgasya ca hṛṣīkeśa pṛthakkeśiniṣūdana || 18-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2136
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 2

श्रीभगवानुवाच ।
काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः ।
सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणाः ॥१८-२॥

śrībhagavānuvāca | kāmyānāṁ karmaṇāṁ nyāsaṁ saṁnyāsaṁ kavayo viduḥ | sarvakarmaphalatyāgaṁ prāhustyāgaṁ vicakṣaṇāḥ || 18-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2179
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 2 के पश्चात चिंतन
2222
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 3

त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिणः ।
यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यमिति चापरे ॥१८-३॥

tyājyaṁ doṣavadityeke karma prāhurmanīṣiṇaḥ | yajñadānatapaḥkarma na tyājyamiti cāpare || 18-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2265
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 4

निश्चयं शृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम ।
त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः सम्प्रकीर्तितः ॥१८-४॥

niścayaṁ śṛṇu me tatra tyāge bharatasattama | tyāgo hi puruṣavyāghra trividhaḥ samprakīrtitaḥ || 18-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2308
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 5

यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत् ।
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम् ॥१८-५॥

yajñadānatapaḥkarma na tyājyaṁ kāryameva tat | yajño dānaṁ tapaścaiva pāvanāni manīṣiṇām || 18-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2351
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 6

एतान्यपि तु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा फलानि च ।
कर्तव्यानीति मे पार्थ निश्चितं मतमुत्तमम् ॥१८-६॥

etānyapi tu karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā phalāni ca | kartavyānīti me pārtha niścitaṁ matamuttamam || 18-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2394
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 6 के पश्चात चिंतन
2437
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 7

नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते ।
मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः ॥१८-७॥

niyatasya tu saṁnyāsaḥ karmaṇo nopapadyate | mohāttasya parityāgastāmasaḥ parikīrtitaḥ || 18-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2480
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 8

दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत् ।
स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत् ॥१८-८॥

duḥkhamityeva yatkarma kāyakleśabhayāttyajet | sa kṛtvā rājasaṁ tyāgaṁ naiva tyāgaphalaṁ labhet || 18-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2523
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 9

कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन ।
सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः ॥१८-९॥

kāryamityeva yatkarma niyataṁ kriyate'rjuna | saṅgaṁ tyaktvā phalaṁ caiva sa tyāgaḥ sāttviko mataḥ || 18-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2566
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 10

न द्वेष्ट्यकुशलं कर्म कुशले नानुषज्जते ।
त्यागी सत्त्वसमाविष्टो मेधावी छिन्नसंशयः ॥१८-१०॥

na dveṣṭyakuśalaṁ karma kuśale nānuṣajjate | tyāgī sattvasamāviṣṭo medhāvī chinnasaṁśayaḥ || 18-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2609
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 11

न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः ।
यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ॥१८-११॥

na hi dehabhṛtā śakyaṁ tyaktuṁ karmāṇyaśeṣataḥ | yastu karmaphalatyāgī sa tyāgītyabhidhīyate || 18-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2652
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 11 के पश्चात चिंतन
2695
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 12

अनिष्टमिष्टं मिश्रं च त्रिविधं कर्मणः फलम् ।
भवत्यत्यागिनां प्रेत्य न तु संन्यासिनां क्वचित् ॥१८-१२॥

aniṣṭamiṣṭaṁ miśraṁ ca trividhaṁ karmaṇaḥ phalam | bhavatyatyāgināṁ pretya na tu saṁnyāsināṁ kvacit || 18-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2738
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 13

पञ्चैतानि महाबाहो कारणानि निबोध मे ।
साङ्ख्ये कृतान्ते प्रोक्तानि सिद्धये सर्वकर्मणाम् ॥१८-१३॥

pañcaitāni mahābāho kāraṇāni nibodha me | sāṅkhye kṛtānte proktāni siddhaye sarvakarmaṇām || 18-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2781
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 14

अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम् ।
विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम् ॥१८-१४॥

adhiṣṭhānaṁ tathā kartā karaṇaṁ ca pṛthagvidham | vividhāśca pṛthakceṣṭā daivaṁ caivātra pañcamam || 18-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2824
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 15

शरीरवाङ्मनोभिर्यत्कर्म प्रारभते नरः ।
न्याय्यं वा विपरीतं वा पञ्चैते तस्य हेतवः ॥१८-१५॥

śarīravāṅmanobhiryatkarma prārabhate naraḥ | nyāyyaṁ vā viparītaṁ vā pañcaite tasya hetavaḥ || 18-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2867
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 16

तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः ।
पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मतिः ॥१८-१६॥

tatraivaṁ sati kartāramātmānaṁ kevalaṁ tu yaḥ | paśyatyakṛtabuddhitvānna sa paśyati durmatiḥ || 18-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2910
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 17

यस्य नाहङ्कृतो भावो बुद्धिर्यस्य न लिप्यते ।
हत्वाऽपि स इमाँल्लोकान्न हन्ति न निबध्यते ॥१८-१७॥

yasya nāhaṅkṛto bhāvo buddhiryasya na lipyate | hatvā'pi sa imām̐llokānna hanti na nibadhyate || 18-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2953
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 17 के पश्चात चिंतन
2996
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 18

ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना ।
करणं कर्म कर्तेति त्रिविधः कर्मसङ्ग्रहः ॥१८-१८॥

jñānaṁ jñeyaṁ parijñātā trividhā karmacodanā | karaṇaṁ karma karteti trividhaḥ karmasaṅgrahaḥ || 18-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

539
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 19

ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः ।
प्रोच्यते गुणसङ्ख्याने यथावच्छृणु तान्यपि ॥१८-१९॥

jñānaṁ karma ca kartā ca tridhaiva guṇabhedataḥ | procyate guṇasaṅkhyāne yathāvacchṛṇu tānyapi || 18-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

582
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 20

सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते ।
अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम् ॥१८-२०॥

sarvabhūteṣu yenaikaṁ bhāvamavyayamīkṣate | avibhaktaṁ vibhakteṣu tajjñānaṁ viddhi sāttvikam || 18-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

625
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 21

पृथक्त्वेन तु यज्ज्ञानं नानाभावान्पृथग्विधान् ।
वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ज्ञानं विद्धि राजसम् ॥१८-२१॥

pṛthaktvena tu yajjñānaṁ nānābhāvānpṛthagvidhān | vetti sarveṣu bhūteṣu tajjñānaṁ viddhi rājasam || 18-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

668
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 22

यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहेतुकम् ।
अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम् ॥१८-२२॥

yattu kṛtsnavadekasminkārye saktamahetukam | atattvārthavadalpaṁ ca tattāmasamudāhṛtam || 18-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

711
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 22 के पश्चात चिंतन
754
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 23

नियतं सङ्गरहितमरागद्वेषतः कृतम् ।
अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विकमुच्यते ॥१८-२३॥

niyataṁ saṅgarahitamarāgadveṣataḥ kṛtam | aphalaprepsunā karma yattatsāttvikamucyate || 18-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

797
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 29

बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं शृणु ।
प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनञ्जय ॥१८-२९॥

buddherbhedaṁ dhṛteścaiva guṇatastrividhaṁ śṛṇu | procyamānamaśeṣeṇa pṛthaktvena dhanañjaya || 18-29 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1098
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 24

यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुनः ।
क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम् ॥१८-२४॥

yattu kāmepsunā karma sāhaṅkāreṇa vā punaḥ | kriyate bahulāyāsaṁ tadrājasamudāhṛtam || 18-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

840
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 30

प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये ।
बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी ॥१८-३०॥

pravṛttiṁ ca nivṛttiṁ ca kāryākārye bhayābhaye | bandhaṁ mokṣaṁ ca yā vetti buddhiḥ sā pārtha sāttvikī || 18-30 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1141
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 25

अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम् ।
मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते ॥१८-२५॥

anubandhaṁ kṣayaṁ hiṁsāmanapekṣya ca pauruṣam | mohādārabhyate karma yattattāmasamucyate || 18-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

883
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 31

यया धर्ममधर्मं च कार्यं चाकार्यमेव च ।
अयथावत्प्रजानाति बुद्धिः सा पार्थ राजसी ॥१८-३१॥

yayā dharmamadharmaṁ ca kāryaṁ cākāryameva ca | ayathāvatprajānāti buddhiḥ sā pārtha rājasī || 18-31 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1184
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 26

मुक्तसङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः ।
सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते ॥१८-२६॥

muktasaṅgo'nahaṁvādī dhṛtyutsāhasamanvitaḥ | siddhyasiddhyornirvikāraḥ kartā sāttvika ucyate || 18-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

926
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 32

अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसावृता ।
सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी ॥१८-३२॥

adharmaṁ dharmamiti yā manyate tamasāvṛtā | sarvārthānviparītāṁśca buddhiḥ sā pārtha tāmasī || 18-32 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1227
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 27

रागी कर्मफलप्रेप्सुलुब्धो हिंसात्मकोऽशुचिः ।
हर्षशोकान्वितः कर्ता राजसः परिकीर्तितः ॥१८-२७॥

rāgī karmaphalaprepsurlubdho hiṁsātmako'śuciḥ | harṣaśokānvitaḥ kartā rājasaḥ parikīrtitaḥ || 18-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

969
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 33

धृत्या यया धारयते मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः ।
योगेनाव्यभिचारिण्या धृतिः सा पार्थ सात्त्विकी ॥१८-३३॥

dhṛtyā yayā dhārayate manaḥprāṇendriyakriyāḥ | yogenāvyabhicāriṇyā dhṛtiḥ sā pārtha sāttvikī || 18-33 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1270
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 28

अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः ।
विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते ॥१८-२८॥

ayuktaḥ prākṛtaḥ stabdhaḥ śaṭho naiṣkṛtiko'lasaḥ | viṣādī dīrghasūtrī ca kartā tāmasa ucyate || 18-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1012
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 34

यया तु धर्मकामार्थान्धृत्या धारयतेऽर्जुन ।
प्रसङ्गेन फलाकाङ्क्षी धृतिः सा पार्थ राजसी ॥१८-३४॥

yayā tu dharmakāmārthāndhṛtyā dhārayate'rjuna | prasaṅgena phalākāṅkṣī dhṛtiḥ sā pārtha rājasī || 18-34 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1313
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 28 के पश्चात चिंतन
1055
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 35

यया स्वप्नं भयं शोकं विषादं मदमेव च ।
न विमुञ्चति दुर्मेधा धृतिः सा पार्थ तामसी ॥१८-३५॥

yayā svapnaṁ bhayaṁ śokaṁ viṣādaṁ madameva ca | na vimuñcati durmedhā dhṛtiḥ sā pārtha tāmasī || 18-35 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1356
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 35 के पश्चात चिंतन
1399
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 36

सुखं त्विदानीं त्रिविधं शृणु मे भरतर्षभ ।
अभ्यासाद्रमते यत्र दुःखान्तं च निगच्छति ॥१८-३६॥

sukhaṁ tvidānīṁ trividhaṁ śṛṇu me bharatarṣabha | abhyāsādramate yatra duḥkhāntaṁ ca nigacchati || 18-36 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1442
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 37

यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम् ।
तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मबुद्धिप्रसादजम् ॥१८-३७॥

yattadagre viṣamiva pariṇāme'mṛtopamam | tatsukhaṁ sāttvikaṁ proktamātmabuddhiprasādajam || 18-37 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1485
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 38

विषयेन्द्रियसंयोगाद्यत्तदग्रेऽमृतोपमम् ।
परिणामे विषमिव तत्सुखं राजसं स्मृतम् ॥१८-३८॥

viṣayendriyasaṁyogādyattadagre'mṛtopamam | pariṇāme viṣamiva tatsukhaṁ rājasaṁ smṛtam || 18-38 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1528
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 39

यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः ।
निद्रालस्यप्रमादोत्थं तत्तामसमुदाहृतम् ॥१८-३९॥

yadagre cānubandhe ca sukhaṁ mohanamātmanaḥ | nidrālasyapramādotthaṁ tattāmasamudāhṛtam || 18-39 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1571
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 40

न तदस्ति पृथिव्यां वा दिवि देवेषु वा पुनः ।
सत्त्वं प्रकृतिजैर्मुक्तं यदेभिः स्यात्त्रिभिर्गुणैः ॥१८-४०॥

na tadasti pṛthivyāṁ vā divi deveṣu vā punaḥ | sattvaṁ prakṛtijairmuktaṁ yadebhiḥ syāttribhirguṇaiḥ || 18-40 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1614
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 40 के पश्चात चिंतन
1657
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 41

ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परन्तप ।
कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः ॥१८-४१॥

brāhmaṇakṣatriyaviśāṁ śūdrāṇāṁ ca parantapa | karmāṇi pravibhaktāni svabhāvaprabhavairguṇaiḥ || 18-41 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1700
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 42

शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च ।
ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम् ॥१८-४२॥

śamo damastapaḥ śaucaṁ kṣāntirārjavameva ca | jñānaṁ vijñānamāstikyaṁ brahmakarma svabhāvajam || 18-42 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1743
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 43

शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम् ।
दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम् ॥१८-४३॥

śauryaṁ tejo dhṛtirdākṣyaṁ yuddhe cāpyapalāyanam | dānamīśvarabhāvaśca kṣātraṁ karma svabhāvajam || 18-43 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1786
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 44

कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यं वैश्यकर्म स्वभावजम् ।
परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यापि स्वभावजम् ॥१८-४४॥

kṛṣigaurakṣyavāṇijyaṁ vaiśyakarma svabhāvajam | paricaryātmakaṁ karma śūdrasyāpi svabhāvajam || 18-44 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1829
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 44 के पश्चात चिंतन
1872
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 45

स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः ।
स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु ॥१८-४५॥

sve sve karmaṇyabhirataḥ saṁsiddhiṁ labhate naraḥ | svakarmanirataḥ siddhiṁ yathā vindati tacchṛṇu || 18-45 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1915
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 46

यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् ।
स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः ॥१८-४६॥

yataḥ pravṛttirbhūtānāṁ yena sarvamidaṁ tatam | svakarmaṇā tamabhyarcya siddhiṁ vindati mānavaḥ || 18-46 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1958
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 47

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम् ॥१८-४७॥

śreyānsvadharmo viguṇaḥ paradharmātsvanuṣṭhitāt | svabhāvaniyataṁ karma kurvannāpnoti kilbiṣam || 18-47 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2001
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 48

सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत् ।
सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः ॥१८-४८॥

sahajaṁ karma kaunteya sadoṣamapi na tyajet | sarvārambhā hi doṣeṇa dhūmenāgnirivāvṛtāḥ || 18-48 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2044
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 49

असक्तबुद्धिः सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृहः ।
नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां संन्यासेनाधिगच्छति ॥१८-४९॥

asaktabuddhiḥ sarvatra jitātmā vigataspṛhaḥ | naiṣkarmyasiddhiṁ paramāṁ saṁnyāsenādhigacchati || 18-49 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2087
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 49 के पश्चात चिंतन
2130
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 50

सिद्धिं प्राप्तो यथा ब्रह्म तथाप्नोति निबोध मे ।
समासेनैव कौन्तेय निष्ठा ज्ञानस्य या परा ॥१८-५०॥

siddhiṁ prāpto yathā brahma tathāpnoti nibodha me | samāsenaiva kaunteya niṣṭhā jñānasya yā parā || 18-50 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2173
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 51

बुद्ध्या विशुद्धया युक्तो धृत्यात्मानं नियम्य च ।
शब्दादीन्विषयांस्त्यक्त्वा रागद्वेषौ व्युदस्य च ॥१८-५१॥

buddhyā viśuddhayā yukto dhṛtyātmānaṁ niyamya ca | śabdādīnviṣayāṁstyaktvā rāgadveṣau vyudasya ca || 18-51 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2216
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 52

विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्कायमानसः ।
ध्यानयोगपरो नित्यं वैराग्यं समुपाश्रितः ॥१८-५२॥

viviktasevī laghvāśī yatavākkāyamānasaḥ | dhyānayogaparo nityaṁ vairāgyaṁ samupāśritaḥ || 18-52 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2259
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 53

अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम् ।
विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥१८-५३॥

ahaṅkāraṁ balaṁ darpaṁ kāmaṁ krodhaṁ parigraham | vimucya nirmamaḥ śānto brahmabhūyāya kalpate || 18-53 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2302
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 54

ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति ।
समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम् ॥१८-५४॥

brahmabhūtaḥ prasannātmā na śocati na kāṅkṣati | samaḥ sarveṣu bhūteṣu madbhaktiṁ labhate parām || 18-54 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2345
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 55

भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः ।
ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम् ॥१८-५५॥

bhaktyā māmabhijānāti yāvānyaścāsmi tattvataḥ | tato māṁ tattvato jñātvā viśate tadanantaram || 18-55 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2388
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 56

सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः ।
मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम् ॥१८-५६॥

sarvakarmāṇyapi sadā kurvāṇo madvyapāśrayaḥ | matprasādādavāpnoti śāśvataṁ padamavyayam || 18-56 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2431
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 57

चेतसा सर्वकर्माणि मयि संन्यस्य मत्परः ।
बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव ॥१८-५७॥

cetasā sarvakarmāṇi mayi saṁnyasya matparaḥ | buddhiyogamupāśritya maccittaḥ satataṁ bhava || 18-57 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2474
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 58

मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि ।
अथ चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि ॥१८-५८॥

maccittaḥ sarvadurgāṇi matprasādāttariṣyasi | atha cettvamahaṅkārānna śroṣyasi vinaṅkṣyasi || 18-58 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2517
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 59

यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे ।
मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वा नियोक्ष्यति ॥१८-५९॥

yadahaṅkāramāśritya na yotsya iti manyase | mithyaiṣa vyavasāyaste prakṛtistvāṁ niyokṣyati || 18-59 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2560
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 60

स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा ।
कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत् ॥१८-६०॥

svabhāvajena kaunteya nibaddhaḥ svena karmaṇā | kartuṁ necchasi yanmohātkariṣyasyavaśo'pi tat || 18-60 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2603
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 61

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति ।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया ॥१८-६१॥

īśvaraḥ sarvabhūtānāṁ hṛddeśe'rjuna tiṣṭhati | bhrāmayansarvabhūtāni yantrārūḍhāni māyayā || 18-61 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2646
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 62

तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत ।
तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम् ॥१८-६२॥

tameva śaraṇaṁ gaccha sarvabhāvena bhārata | tatprasādātparāṁ śāntiṁ sthānaṁ prāpsyasi śāśvatam || 18-62 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2689
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 62 के पश्चात चिंतन
2732
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 63

इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया ।
विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु ॥१८-६३॥

iti te jñānamākhyātaṁ guhyādguhyataraṁ mayā | vimṛśyaitadaśeṣeṇa yathecchasi tathā kuru || 18-63 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2775
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 64

सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचः ।
इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम् ॥१८-६४॥

sarvaguhyatamaṁ bhūyaḥ śṛṇu me paramaṁ vacaḥ | iṣṭo'si me dṛḍhamiti tato vakṣyāmi te hitam || 18-64 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2818
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 65

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे ॥१८-६५॥

manmanā bhava madbhakto madyājī māṁ namaskuru | māmevaiṣyasi satyaṁ te pratijāne priyo'si me || 18-65 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2861
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 66

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥१८-६६॥

sarvadharmānparityajya māmekaṁ śaraṇaṁ vraja | ahaṁ tvā sarvapāpebhyo mokṣayiṣyāmi mā śucaḥ || 18-66 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2904
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 66 के पश्चात चिंतन
2947
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 67

इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन ।
न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ॥१८-६७॥

idaṁ te nātapaskāya nābhaktāya kadācana | na cāśuśrūṣave vācyaṁ na ca māṁ yo'bhyasūyati || 18-67 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2990
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 68

य इदं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति ।
भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः ॥१८-६८॥

ya idaṁ paramaṁ guhyaṁ madbhakteṣvabhidhāsyati | bhaktiṁ mayi parāṁ kṛtvā māmevaiṣyatyasaṁśayaḥ || 18-68 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

533
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 69

न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः ।
भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि ॥१८-६९॥

na ca tasmānmanuṣyeṣu kaścinme priyakṛttamaḥ | bhavitā na ca me tasmādanyaḥ priyataro bhuvi || 18-69 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

576
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 70

अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः ।
ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः ॥१८-७०॥

adhyeṣyate ca ya imaṁ dharmyaṁ saṁvādamāvayoḥ | jñānayajñena tenāhamiṣṭaḥ syāmiti me matiḥ || 18-70 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

619
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 71

श्रद्धावाननसूयश्च शृणुयादपि यो नरः ।
सोऽपि मुक्तः शुभाँल्लोकान्प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम् ॥१८-७१॥

śraddhāvānanasūyaśca śṛṇuyādapi yo naraḥ | so'pi muktaḥ śubhām̐llokānprāpnuyātpuṇyakarmaṇām || 18-71 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

662
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 71 के पश्चात चिंतन
705
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 72

कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा ।
कच्चिदज्ञानसम्मोहः प्रनष्टस्ते धनञ्जय ॥१८-७२॥

kaccidetacchrutaṁ pārtha tvayaikāgreṇa cetasā | kaccidajñānasammohaḥ pranaṣṭaste dhanañjaya || 18-72 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

748
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 73

अर्जुन उवाच ।
नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत ।
स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव ॥१८-७३॥

arjuna uvāca | naṣṭo mohaḥ smṛtirlabdhā tvatprasādānmayācyuta | sthito'smi gatasandehaḥ kariṣye vacanaṁ tava || 18-73 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

791
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 74

सञ्जय उवाच ।
इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः ।
संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम् ॥१८-७४॥

sañjaya uvāca | ityahaṁ vāsudevasya pārthasya ca mahātmanaḥ | saṁvādamimamaśrauṣamadbhutaṁ romaharṣaṇam || 18-74 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

834
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 75

व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम् ।
योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयतः स्वयम् ॥१८-७५॥

vyāsaprasādācchrutavānetadguhyamahaṁ param | yogaṁ yogeśvarātkṛṣṇātsākṣātkathayataḥ svayam || 18-75 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

877
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 76

राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम् ।
केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः ॥१८-७६॥

rājansaṁsmṛtya saṁsmṛtya saṁvādamimamadbhutam | keśavārjunayoḥ puṇyaṁ hṛṣyāmi ca muhurmuhuḥ || 18-76 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

920
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 77

तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः ।
विस्मयो मे महान् राजन्हृष्यामि च पुनः पुनः ॥१८-७७॥

tacca saṁsmṛtya saṁsmṛtya rūpamatyadbhutaṁ hareḥ | vismayo me mahān rājanhṛṣyāmi ca punaḥ punaḥ || 18-77 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

963
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 78

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥१८-७८॥

yatra yogeśvaraḥ kṛṣṇo yatra pārtho dhanurdharaḥ | tatra śrīrvijayo bhūtirdhruvā nītirmatirmama || 18-78 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1006
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 78 के पश्चात चिंतन
1049
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 18 • श्लोक क्रमांक 79

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
मोक्षसंन्यासयोगो नाम अष्टादशोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde mokṣasaṁnyāsayogo nāma aṣṭādaśo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1092
Daily Gita Sadhana

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भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्