भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 1

सञ्जय उवाच ।
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् ।
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥२-१॥

sañjaya uvāca | taṁ tathā kṛpayāviṣṭamaśrupūrṇākulekṣaṇam | viṣīdantamidaṁ vākyamuvāca madhusūdanaḥ || 2-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1225
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 2

श्रीभगवानुवाच ।
कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम् ।
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन ॥२-२॥

śrībhagavānuvāca | kutastvā kaśmalamidaṁ viṣame samupasthitam | anāryajuṣṭamasvargyamakīrtikaramarjuna || 2-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1268
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 3

क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते ।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ॥२-३॥

klaibyaṁ mā sma gamaḥ pārtha naitattvayyupapadyate | kṣudraṁ hṛdayadaurbalyaṁ tyaktvottiṣṭha parantapa || 2-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1311
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 4

अर्जुन उवाच ।
कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन ।
इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन ॥२-४॥

arjuna uvāca | kathaṁ bhīṣmamahaṁ saṅkhye droṇaṁ ca madhusūdana | iṣubhiḥ pratiyotsyāmi pūjārhāvarisūdana || 2-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1354
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 5

गुरून्हत्वा हि महानुभावान् श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके ।
हत्वार्थकामांस्तु गुरुनिहैव भुञ्जीय भोगान्रुधिरप्रदिग्धान् ॥२-५॥

gurūnahatvā hi mahānubhāvān śreyo bhoktuṁ bhaikṣyamapīha loke | hatvārthakāmāṁstu gurūnihaiva bhuñjīya bhogānrudhirapradigdhān || 2-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1397
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 6

न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः ।
यानेव हत्वा न जिजीविषामस्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ॥२-६॥

na caitadvidmaḥ kataranno garīyo yadvā jayema yadi vā no jayeyuḥ | yāneva hatvā na jijīviṣāmaste'vasthitāḥ pramukhe dhārtarāṣṭrāḥ || 2-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1440
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 7

कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः ।
यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् ॥२-७॥

kārpaṇyadoṣopahatasvabhāvaḥ pṛcchāmi tvāṁ dharmasammūḍhacetāḥ | yacchreyaḥ syānniścitaṁ brūhi tanme śiṣyaste'haṁ śādhi māṁ tvāṁ prapannam || 2-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1483
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 8

न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम् ।
अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धं राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् ॥२-८॥

na hi prapaśyāmi mamāpanudyādyacchokamucchoṣaṇamindriyāṇām | avāpya bhūmāvasapatnamṛddhaṁ rājyaṁ surāṇāmapi cādhipatyam || 2-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1526
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 8 के पश्चात चिंतन
1569
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 9

सञ्जय उवाच ।
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप ।
न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह ॥२-९॥

sañjaya uvāca | evamuktvā hṛṣīkeśaṁ guḍākeśaḥ parantapa | na yotsya iti govindamuktvā tūṣṇīṁ babhūva ha || 2-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1612
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 10

तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः ॥२-१०॥

tamuvāca hṛṣīkeśaḥ prahasanniva bhārata | senayorubhayormadhye viṣīdantamidaṁ vacaḥ || 2-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1655
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 11

श्रीभगवानुवाच ।
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे ।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ॥२-११॥

śrībhagavānuvāca | aśocyānanvaśocastvaṁ prajñāvādāṁśca bhāṣase | gatāsūnagatāsūṁśca nānuśocanti paṇḍitāḥ || 2-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1698
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 12

न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः ।
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम् ॥२-१२॥

na tvevāhaṁ jātu nāsaṁ na tvaṁ neme janādhipāḥ | na caiva na bhaviṣyāmaḥ sarve vayamataḥ param || 2-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1741
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 13

देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा ।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति ॥२-१३॥

dehino'sminyathā dehe kaumāraṁ yauvanaṁ jarā | tathā dehāntaraprāptirdhīrastatra na muhyati || 2-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1784
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 14

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥२-१४॥

mātrāsparśāstu kaunteya śītoṣṇasukhaduḥkhadāḥ | āgamāpāyino'nityāstāṁstitikṣasva bhārata || 2-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1827
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 15

यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ ।
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते ॥२-१५॥

yaṁ hi na vyathayantyete puruṣaṁ puruṣarṣabha | samaduḥkhasukhaṁ dhīraṁ so'mṛtatvāya kalpate || 2-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1870
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 15 के पश्चात चिंतन
1913
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 16

नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः ।
उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः ॥२-१६॥

nāsato vidyate bhāvo nābhāvo vidyate sataḥ | ubhayorapi dṛṣṭo'ntastvanayostattvadarśibhiḥ || 2-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1956
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 17

अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम् ।
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति ॥२-१७॥

avināśi tu tadviddhi yena sarvamidaṁ tatam | vināśamavyayasyāsya na kaścitkartumarhati || 2-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1999
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 18

अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः ।
अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत ॥२-१८॥

antavanta ime dehā nityasyoktāḥ śarīriṇaḥ | anāśino'prameyasya tasmādyudhyasva bhārata || 2-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2042
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 18 के पश्चात चिंतन
2085
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 19

य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् ।
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते ॥२-१९॥

ya enaṁ vetti hantāraṁ yaścainaṁ manyate hatam | ubhau tau na vijānīto nāyaṁ hanti na hanyate || 2-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2128
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 20

न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः ।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥२-२०॥

na jāyate mriyate vā kadācinnāyaṁ bhūtvā bhavitā vā na bhūyaḥ | ajo nityaḥ śāśvato'yaṁ purāṇo na hanyate hanyamāne śarīre || 2-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2171
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 21

वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् ।
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम् ॥२-२१॥

vedāvināśinaṁ nityaṁ ya enamajamavyayam | kathaṁ sa puruṣaḥ pārtha kaṁ ghātayati hanti kam || 2-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2214
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 21 के पश्चात चिंतन
2257
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 22

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥२-२२॥

vāsāṁsi jīrṇāni yathā vihāya navāni gṛhṇāti naro'parāṇi | tathā śarīrāṇi vihāya jīrṇā nyanyāni saṁyāti navāni dehī || 2-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2300
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 23

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥२-२३॥

nainaṁ chindanti śastrāṇi nainaṁ dahati pāvakaḥ | na cainaṁ kledayantyāpo na śoṣayati mārutaḥ || 2-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2343
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 24

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च ।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥२-२४॥

acchedyo'yamadāhyo'yamakledyo'śoṣya eva ca | nityaḥ sarvagataḥ sthāṇuracalo'yaṁ sanātanaḥ || 2-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2386
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 25

अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते ।
तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि ॥२-२५॥

avyakto'yamacintyo'yamavikāryo'yamucyate | tasmādevaṁ viditvainaṁ nānuśocitumarhasi || 2-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2429
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 25 के पश्चात चिंतन
2472
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 26

अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् ।
तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि ॥२-२६॥

atha cainaṁ nityajātaṁ nityaṁ vā manyase mṛtam | tathāpi tvaṁ mahābāho naivaṁ śocitumarhasi || 2-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2515
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 27

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च ।
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ॥२-२७॥

jātasya hi dhruvo mṛtyurdhruvaṁ janma mṛtasya ca | tasmādaparihārye'rthe na tvaṁ śocitumarhasi || 2-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2558
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 28

अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत ।
अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना ॥२-२८॥

avyaktādīni bhūtāni vyaktamadhyāni bhārata | avyaktanidhanānyeva tatra kā paridevanā || 2-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2601
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 29

आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनम् आश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः ।
आश्चर्यवच्चैनमन्यः शृणोति श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् ॥२-२९॥

āścaryavatpaśyati kaścidēnam āścaryavadvadati tathaiva cānyaḥ | āścaryavaccainamanyaḥ śṛṇoti śrutvāpyenaṁ veda na caiva kaścit || 2-29 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2644
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 30

देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत ।
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ॥२-३०॥

dehī nityamavadhyo'yaṁ dehe sarvasya bhārata | tasmātsarvāṇi bhūtāni na tvaṁ śocitumarhasi || 2-30 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2687
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 30 के पश्चात चिंतन
2730
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 31

स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि ।
धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते ॥२-३१॥

svadharmamapi cāvekṣya na vikampitumarhasi | dharmyāddhi yuddhācchreyo'nyatkṣatriyasya na vidyate || 2-31 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2773
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 32

यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् ।
सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ॥२-३२॥

yadṛcchayā copapannaṁ svargadvāramapāvṛtam | sukhinaḥ kṣatriyāḥ pārtha labhante yuddhamīdṛśam || 2-32 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2816
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 33

अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं सङ्ग्रामं न करिष्यसि ।
ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि ॥२-३३॥

atha cettvamimaṁ dharmyaṁ saṅgrāmaṁ na kariṣyasi | tataḥ svadharmaṁ kīrtiṁ ca hitvā pāpamavāpsyasi || 2-33 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2859
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 34

अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् ।
सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ॥२-३४॥

akīrtiṁ cāpi bhūtāni kathayiṣyanti te'vyayām | sambhāvitasya cākīrtirmaraṇādatiricyate || 2-34 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2902
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 35

भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः ।
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ॥२-३५॥

bhayādraṇāduparataṁ maṁsyante tvāṁ mahārathāḥ | yeṣāṁ ca tvaṁ bahumato bhūtvā yāsyasi lāghavam || 2-35 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2945
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 36

अवाच्यवादांश्च बहून्वदिष्यन्ति तवाहिताः ।
निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम् ॥२-३६॥

avācyavādāṁśca bahūnvadiṣyanti tavāhitāḥ | nindantastava sāmarthyaṁ tato duḥkhataraṁ nu kim || 2-36 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2988
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 37

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् ।
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः ॥२-३७॥

hato vā prāpsyasi svargaṁ jitvā vā bhokṣyase mahīm | tasmāduttiṣṭha kaunteya yuddhāya kṛtaniścayaḥ || 2-37 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

531
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 38

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥२-३८॥

sukhaduḥkhe same kṛtvā lābhālābhau jayājayau | tato yuddhāya yujyasva naivaṁ pāpamavāpsyasi || 2-38 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

574
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 38 के पश्चात चिंतन
617
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 39

एषा तेऽभिहिता साङ्ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु ।
बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि ॥२-३९॥

eṣā te'bhihitā sāṅkhye buddhiryoge tvimāṁ śṛṇu | buddhyā yukto yayā pārtha karmabandhaṁ prahāsyasi || 2-39 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

660
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 40

नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते ।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ॥२-४०॥

nehābhikramanāśo'sti pratyavāyo na vidyate | svalpamapyasya dharmasya trāyate mahato bhayāt || 2-40 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

703
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 41

व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन ।
बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम् ॥२-४१॥

vyavasāyātmikā buddhirekeha kurunandana | bahuśākhā hyanantāśca buddhayo'vyavasāyinām || 2-41 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

746
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 42

यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः ।
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः ॥२-४२॥

yāmimāṁ puṣpitāṁ vācaṁ pravadantyavipaścitaḥ | vedavādaratāḥ pārtha nānyadastīti vādinaḥ || 2-42 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

789
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 43

कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम् ।
क्रियाविशेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति ॥२-४३॥

kāmātmānaḥ svargaparā janmakarmaphalapradām | kriyāviśeṣabahulāṁ bhogaiśvaryagatiṁ prati || 2-43 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

832
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 44

भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहतचेतसाम् ।
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते ॥२-४४॥

bhogaiśvaryaprasaktānāṁ tayāpahatacetasām | vyavasāyātmikā buddhiḥ samādhau na vidhīyate || 2-44 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

875
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 44 के पश्चात चिंतन
918
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 45

त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन ।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् ॥२-४५॥

traiguṇyaviṣayā vedā nistraiguṇyo bhavārjuna | nirdvandvo nityasattvastho niryogakṣema ātmavān || 2-45 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

961
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 46

यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके ।
तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः ॥२-४६॥

yāvānartha udapāne sarvataḥ samplutodake | tāvānsarveṣu vedeṣu brāhmaṇasya vijānataḥ || 2-46 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1004
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 47

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥२-४७॥

karmaṇyevādhikāraste mā phaleṣu kadācana | mā karmaphalaheturbhūrmā te saṅgo'stvakarmaṇi || 2-47 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1047
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 48

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय ।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥२-४८॥

yogasthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā dhanañjaya | siddhyasiddhyoḥ samo bhūtvā samatvaṁ yoga ucyate || 2-48 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1090
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 49

दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनञ्जय ।
बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः ॥२-४९॥

dūreṇa hyavaraṁ karma buddhiyogāddhanañjaya | buddhau śaraṇamanviccha kṛpaṇāḥ phalahetavaḥ || 2-49 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1133
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 50

बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते ।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ॥२-५०॥

buddhiyukto jahātīha ubhe sukṛtaduṣkṛte | tasmādyogāya yujyasva yogaḥ karmasu kauśalam || 2-50 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1176
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 51

कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः ।
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम् ॥२-५१॥

karmajaṁ buddhiyuktā hi phalaṁ tyaktvā manīṣiṇaḥ | janmabandhavinirmuktāḥ padaṁ gacchantyanāmayam || 2-51 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1219
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 52

यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति ।
तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ॥२-५२॥

yadā te mohakalilaṁ buddhirvyatitariṣyati | tadā gantāsi nirvedaṁ śrotavyasya śrutasya ca || 2-52 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1262
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 53

श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला ।
समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि ॥२-५३॥

śrutivipratipannā te yadā sthāsyati niścalā | samādhāvacalā buddhistadā yogamavāpsyasi || 2-53 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1305
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 53 के पश्चात चिंतन
1348
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 54

अर्जुन उवाच ।
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव ।
स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम् ॥२-५४॥

arjuna uvāca | sthitaprajñasya kā bhāṣā samādhisthasya keśava | sthitadhīḥ kiṁ prabhāṣeta kimāsīta vrajeta kim || 2-54 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1391
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 55

श्रीभगवानुवाच ।
प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् ।
आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते ॥२-५५॥

śrībhagavānuvāca | prajahāti yadā kāmānsarvānpārtha manogatān | ātmanyevātmanā tuṣṭaḥ sthitaprajñastadocyate || 2-55 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1434
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 56

दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः ।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥२-५६॥

duḥkheṣvanudvignamanāḥ sukheṣu vigataspṛhaḥ | vītarāgabhayakrodhaḥ sthitadhīrmunirucyate || 2-56 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1477
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 57

यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् ।
नाभिनन्दति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥२-५७॥

yaḥ sarvatrānabhisnehastattatprāpya śubhāśubham | nābhinandati na dveṣṭi tasya prajñā pratiṣṭhitā || 2-57 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1520
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 58

यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः ।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥२-५८॥

yadā saṁharate cāyaṁ kūrmo'ṅgānīva sarvaśaḥ | indriyāṇīndriyārthebhyastasya prajñā pratiṣṭhitā || 2-58 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1563
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 59

विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः ।
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते ॥२-५९॥

viṣayā vinivartante nirāhārasya dehinaḥ | rasavarjaṁ raso'pyasya paraṁ dṛṣṭvā nivartate || 2-59 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1606
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 60

यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः ।
इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः ॥२-६०॥

yatato hyapi kaunteya puruṣasya vipaścitaḥ | indriyāṇi pramāthīni haranti prasabhaṁ manaḥ || 2-60 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1649
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 61

तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः ।
वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥२-६१॥

tāni sarvāṇi saṁyamya yukta āsīta matparaḥ | vaśe hi yasyendriyāṇi tasya prajñā pratiṣṭhitā || 2-61 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1692
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 61 के पश्चात चिंतन
1735
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 62

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते ।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥२-६२॥

dhyāyato viṣayānpuṁsaḥ saṅgasteṣūpajāyate | saṅgātsañjāyate kāmaḥ kāmātkrodho'bhijāyate || 2-62 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1778
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 63

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः ।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥२-६३॥

krodhādbhavati sammohaḥ sammohātsmṛtivibhramaḥ | smṛtibhraṁśād buddhināśo buddhināśātpraṇaśyati || 2-63 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1821
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 64

रागद्वेषविमुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन् ।
आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति ॥२-६४॥

rāgadveṣavimuktaistu viṣayānindriyaiścaran | ātmavaśyairvidheyātmā prasādamadhigacchati || 2-64 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1864
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 65

प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते ।
प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते ॥२-६५॥

prasāde sarvaduḥkhānāṁ hānirasyopajāyate | prasannacetaso hyāśu buddhiḥ paryavatiṣṭhate || 2-65 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1907
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 66

नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना ।
न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम् ॥२-६६॥

nāsti buddhirayuktasya na cāyuktasya bhāvanā | na cābhāvayataḥ śāntiraśāntasya kutaḥ sukham || 2-66 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1950
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 67

इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते ।
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि ॥२-६७॥

indriyāṇāṁ hi caratāṁ yanmano'nuvidhīyate | tadasya harati prajñāṁ vāyurnāvamivāmbhasi || 2-67 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1993
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 68

तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः ।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥२-६८॥

tasmādyasya mahābāho nigṛhītāni sarvaśaḥ | indriyāṇīndriyārthebhyastasya prajñā pratiṣṭhitā || 2-68 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2036
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 68 के पश्चात चिंतन
2079
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 69

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी ।
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ॥२-६९॥

yā niśā sarvabhūtānāṁ tasyāṁ jāgarti saṁyamī | yasyāṁ jāgrati bhūtāni sā niśā paśyato muneḥ || 2-69 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2122
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 70

आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् ।
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी ॥२-७०॥

āpūryamāṇamacalapratiṣṭhaṁ samudramāpaḥ praviśanti yadvat | tadvatkāmā yaṁ praviśanti sarve sa śāntimāpnoti na kāmakāmī || 2-70 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2165
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 71

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः ।
निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ॥२-७१॥

vihāya kāmānyaḥ sarvānpumāṁścarati niḥspṛhaḥ | nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntimadhigacchati || 2-71 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2208
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 72

एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति ।
स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ॥२-७२॥

eṣā brāhmī sthitiḥ pārtha naināṁ prāpya vimuhyati | sthitvāsyāmantakāle'pi brahmanirvāṇamṛcchati || 2-72 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2251
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 72 के पश्चात चिंतन
2294
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 2 • श्लोक क्रमांक 73

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
सांख्ययोगो नाम द्वितीयोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde sāṅkhyayogo nāma dvitīyo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2337
Daily Gita Sadhana

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Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्