भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 1

अर्जुन उवाच ।
ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन ।
तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ॥३-१॥

arjuna uvāca | jyāyasī cetkarmaṇaste matā buddhirjanārdana | tatkiṁ karmaṇi ghore māṁ niyojayasi keśava || 3-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2380
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 2

व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे ।
तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम् ॥३-२॥

vyāmiśreṇeva vākyena buddhiṁ mohayasīva me | tadekaṁ vada niścitya yena śreyo'hamāpnuyām || 3-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2423
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 3

श्रीभगवानुवाच ।
लोकेऽस्मिन् द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघ ।
ज्ञानयोगेन साङ्ख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम् ॥३-३॥

śrībhagavānuvāca | loke'smin dvividhā niṣṭhā purā proktā mayānagha | jñānayogena sāṅkhyānāṁ karmayogena yoginām || 3-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2466
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 4

न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते ।
न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति ॥३-४॥

na karmaṇāmanārambhānnaiṣkarmyaṁ puruṣo'śnute | na ca saṁnyasanādeva siddhiṁ samadhigacchati || 3-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2509
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 5

न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् ।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ॥३-५॥

na hi kaścitkṣaṇamapi jātu tiṣṭhatyakarmakṛt | kāryate hyavaśaḥ karma sarvaḥ prakṛtijairguṇaiḥ || 3-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2552
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 5 के पश्चात चिंतन
2595
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 6

कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् ।
इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते ॥३-६॥

karmendriyāṇi saṁyamya ya āste manasā smaran | indriyārthānvimūḍhātmā mithyācāraḥ sa ucyate || 3-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2638
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 7

यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेऽर्जुन ।
कर्मेन्द्रियैः कर्मयोगमसक्तः स विशिष्यते ॥३-७॥

yastvindriyāṇi manasā niyamyārabhate'rjuna | karmendriyaiḥ karmayogamasaktaḥ sa viśiṣyate || 3-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2681
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 8

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः ।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः ॥३-८॥

niyataṁ kuru karma tvaṁ karma jyāyo hyakarmaṇaḥ | śarīrayātrāpi ca te na prasiddhyedakarmaṇaḥ || 3-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2724
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 9

यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः ।
तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्गः समाचर ॥३-९॥

yajñārthātkarmaṇo'nyatra loko'yaṁ karmabandhanaḥ | tadarthaṁ karma kaunteya muktasaṅgaḥ samācara || 3-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2767
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 9 के पश्चात चिंतन
2810
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 10

सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः ।
अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक् ॥३-१०॥

sahayajñāḥ prajāḥ sṛṣṭvā purovāca prajāpatiḥ | anena prasaviṣyadhvameṣa vo'stviṣṭakāmadhuk || 3-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2853
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 11

देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः ।
परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ॥३-११॥

devānbhāvayatānena te devā bhāvayantu vaḥ | parasparaṁ bhāvayantaḥ śreyaḥ paramavāpsyatha || 3-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2896
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 12

इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविताः ।
तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुङ्क्ते स्तेन एव सः ॥३-१२॥

iṣṭānbhogānhi vo devā dāsyante yajñabhāvitāḥ | tairdattānapradāyaibhyo yo bhuṅkte stena eva saḥ || 3-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2939
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 13

यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः ।
भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात् ॥३-१३॥

yajñaśiṣṭāśinaḥ santo mucyante sarvakilbiṣaiḥ | bhuñjate te tvaghaṁ pāpā ye pacantyātmakāraṇāt || 3-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2982
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 14

अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः ।
यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः ॥३-१४॥

annādbhavanti bhūtāni parjanyādannasambhavaḥ | yajñādbhavati parjanyo yajñaḥ karmasamudbhavaḥ || 3-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

525
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 14 के पश्चात चिंतन
568
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 15

कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम् ।
तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम् ॥३-१५॥

karma brahmodbhavaṁ viddhi brahmākṣarasamudbhavam | tasmātsarvagataṁ brahma nityaṁ yajñe pratiṣṭhitam || 3-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

611
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 16

एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः ।
अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति ॥३-१६॥

evaṁ pravartitaṁ cakraṁ nānuvartayatīha yaḥ | aghāyurindriyārāmo moghaṁ pārtha sa jīvati || 3-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

654
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 17

यस्त्वात्मरतिरेव स्यादात्मतृप्तश्च मानवः ।
आत्मन्येव च सन्तुष्टस्तस्य कार्यं न विद्यते ॥३-१७॥

yastvātmaratireva syādātmatṛptaśca mānavaḥ | ātmanyeva ca santuṣṭastasya kāryaṁ na vidyate || 3-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

697
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 18

नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन ।
न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः ॥३-१८॥

naiva tasya kṛtenārtho nākṛteneha kaścana | na cāsya sarvabhūteṣu kaścidarthavyapāśrayaḥ || 3-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

740
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 19

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर ।
असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ॥३-१९॥

tasmādasaktaḥ satataṁ kāryaṁ karma samācara | asakto hyācarankarma paramāpnoti pūruṣaḥ || 3-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

783
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 20

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः ।
लोकसङ्ग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमहसि ॥३-२०॥

karmaṇaiva hi saṁsiddhimāsthitā janakādayaḥ | lokasaṅgrahamevāpi sampaśyankartumarhasi || 3-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

826
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 21

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः ।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥३-२१॥

yadyadācarati śreṣṭhastattadevetaro janaḥ | sa yatpramāṇaṁ kurute lokastadanuvartate || 3-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

869
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 21 के पश्चात चिंतन
912
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 22

न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किञ्चन ।
नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि ॥३-२२॥

na me pārthāsti kartavyaṁ triṣu lokeṣu kiñcana | nānavāptamavāptavyaṁ varta eva ca karmaṇi || 3-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

955
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 23

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥३-२३॥

yadi hyahaṁ na varteyaṁ jātu karmaṇyatandritaḥ | mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ || 3-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

998
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 24

उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम् ।
सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः ॥३-२४॥

utsīdeyurime lokā na kuryāṁ karma cedaham | saṅkarasya ca kartā syāmupahanyāmimāḥ prajāḥ || 3-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1041
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 25

सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत ।
कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम् ॥३-२५॥

saktāḥ karmaṇyavidvāṁso yathā kurvanti bhārata | kuryādvidvāṁstathāsaktaścikīrṣurlokasaṅgraham || 3-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1084
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 26

न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम् ।
जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन् ॥३-२६॥

na buddhibhedaṁ janayedajñānāṁ karmasaṅginām | joṣayetsarvakarmāṇi vidvānyuktaḥ samācaran || 3-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1127
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 27

प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः ।
अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते ॥३-२७॥

prakṛteḥ kriyamāṇāni guṇaiḥ karmāṇi sarvaśaḥ | ahaṅkāravimūḍhātmā kartāhamiti manyate || 3-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1170
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 27 के पश्चात चिंतन
1213
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 28

तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयोः ।
गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते ॥३-२८॥

tattvavittu mahābāho guṇakarmavibhāgayoḥ | guṇā guṇeṣu vartanta iti matvā na sajjate || 3-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1256
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 29

प्रकृतेर्गुणसम्मूढाः सज्जन्ते गुणकर्मसु ।
तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत् ॥३-२९॥

prakṛterguṇasammūḍhāḥ sajjante guṇakarmasu | tānakṛtsnavido mandānkṛtsnavinna vicālayet || 3-29 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1299
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 30

मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा ।
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥३-३०॥

mayi sarvāṇi karmāṇi saṁnyasyādhyātmacetasā | nirāśīrnirmamo bhūtvā yudhyasva vigatajvaraḥ || 3-30 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1342
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 31

ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः ।
श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभिः ॥३-३१॥

ye me matamidaṁ nityamanutiṣṭhanti mānavāḥ | śraddhāvanto'nasūyanto mucyante te'pi karmabhiḥ || 3-31 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1385
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 32

ये त्वेतदभ्यसूयन्तो नानुतिष्ठन्ति मे मतम् ।
सर्वज्ञानविमूढांस्तान्विद्धि नष्टानचेतसः ॥३-३२॥

ye tvetadabhyasūyanto nānutiṣṭhanti me matam | sarvajñānavimūḍhāṁstānviddhi naṣṭānacetasaḥ || 3-32 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1428
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 33

सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि ।
प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति ॥३-३३॥

sadṛśaṁ ceṣṭate svasyāḥ prakṛterjñānavānapi | prakṛtiṁ yānti bhūtāni nigrahaḥ kiṁ kariṣyati || 3-33 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1471
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 34

इन्द्रियस्येन्द्रियस्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ ।
तयोर्न वशमागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपन्थिनौ ॥३-३४॥

indriyasyendriyasyārthe rāgadveṣau vyavasthitau | tayorna vaśamāgacchettau hyasya paripanthinau || 3-34 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1514
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 35

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥३-३५॥

śreyānsvadharmo viguṇaḥ paradharmātsvanuṣṭhitāt | svadharme nidhanaṁ śreyaḥ paradharmo bhayāvahaḥ || 3-35 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1557
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 35 के पश्चात चिंतन
1600
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 36

अर्जुन उवाच ।
अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः ।
अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजितः ॥३-३६॥

arjuna uvāca | atha kena prayukto'yaṁ pāpaṁ carati pūruṣaḥ | anicchannapi vārṣṇeya balādiva niyojitaḥ || 3-36 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1643
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 37

श्रीभगवानुवाच ।
काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः ।
महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् ॥३-३७॥

śrībhagavānuvāca | kāma eṣa krodha eṣa rajoguṇasamudbhavaḥ | mahāśano mahāpāpmā viddhyenamiha vairiṇam || 3-37 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1686
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 38

धूमेनाव्रियते वह्निर्यथादर्शो मलेन च ।
यथोल्बेनावृतो गर्भस्तथा तेनेदमावृतम् ॥३-३८॥

dhūmenāvriyate vahniryathādarśo malena ca | yatholbenāvṛto garbhastathā tenedamāvṛtam || 3-38 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1729
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 39

आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा ।
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च ॥३-३९॥

āvṛtaṁ jñānametena jñānino nityavairiṇā | kāmarūpeṇa kaunteya duṣpūreṇānalena ca || 3-39 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1772
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 40

इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते ।
एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम् ॥३-४०॥

indriyāṇi mano buddhirasyādhiṣṭhānamucyate | etairvimohayatyeṣa jñānamāvṛtya dehinam || 3-40 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1815
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 41

तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ ।
पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ॥३-४१॥

tasmāttvamindriyāṇyādau niyamya bharatarṣabha | pāpmānaṁ prajahi hyenaṁ jñānavijñānanāśanam || 3-41 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1858
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 42

इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः ।
मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः ॥३-४२॥

indriyāṇi parāṇyāhurindriyebhyaḥ paraṁ manaḥ | manasastu parā buddhiryo buddheḥ paratastu saḥ || 3-42 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1901
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 43

एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना ।
जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ॥३-४३॥

evaṁ buddheḥ paraṁ buddhvā saṁstabhyātmānamātmanā | jahi śatruṁ mahābāho kāmarūpaṁ durāsadam || 3-43 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1944
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 43 के पश्चात चिंतन
1987
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 3 • श्लोक क्रमांक 44

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
कर्मयोगो नाम तृतीयोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde karmayogo nāma tṛtīyo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2030
Daily Gita Sadhana

Listen to One Sacred Verse Daily & Practice in Life

Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्