भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 1

श्रीभगवानुवाच ।
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् ।
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् ॥४-१॥

śrībhagavānuvāca | imaṁ vivasvate yogaṁ proktavānahamavyayam | vivasvānmanave prāha manurikṣvākave'bravīt || 4-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2073
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 2

एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः ।
स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥४-२॥

evaṁ paramparāprāptamimaṁ rājarṣayo viduḥ | sa kāleneha mahatā yogo naṣṭaḥ parantapa || 4-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2116
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 3

स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः ।
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ॥४-३॥

sa evāyaṁ mayā te'dya yogaḥ proktaḥ purātanaḥ | bhakto'si me sakhā ceti rahasyaṁ hyetaduttamam || 4-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2159
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 4

अर्जुन उवाच ।
अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः ।
कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति ॥४-४॥

arjuna uvāca | aparaṁ bhavato janma paraṁ janma vivasvataḥ | kathametadvijānīyāṁ tvamādau proktavāniti || 4-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2202
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 4 के पश्चात चिंतन
2245
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 5

श्रीभगवानुवाच ।
बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन ।
तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ॥४-५॥

śrībhagavānuvāca | bahūni me vyatītāni janmāni tava cārjuna | tānyahaṁ veda sarvāṇi na tvaṁ vettha parantapa || 4-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2288
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 6

अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन् ।
प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया ॥४-६॥

ajo'pi sannavyayātmā bhūtānāmīśvaro'pi san | prakṛtiṁ svāmadhiṣṭhāya sambhavāmyātmamāyayā || 4-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2331
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 7

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥४-७॥

yadā yadā hi dharmasya glānirbhavati bhārata | abhyutthānamadharmasya tadātmānaṁ sṛjāmyaham || 4-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2374
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 8

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥४-८॥

paritrāṇāya sādhūnāṁ vināśāya ca duṣkṛtām | dharmasaṁsthāpanārthāya sambhavāmi yuge yuge || 4-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2417
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 9

जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः ।
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥४-९॥

janma karma ca me divyamevaṁ yo vetti tattvataḥ | tyaktvā dehaṁ punarjanma naiti māmeti so'rjuna || 4-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2460
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 9 के पश्चात चिंतन
2503
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 10

वीतरागभयक्रोध मन्मया मामुपाश्रिताः ।
बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ॥४-१०॥

vītarāgabhayakrodhā manmayā māmupāśritāḥ | bahavo jñānatapasā pūtā madbhāvamāgatāḥ || 4-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2546
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 11

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥४-११॥

ye yathā māṁ prapadyante tāṁstathaiva bhajāmyaham | mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ || 4-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2589
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 12

काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः ।
क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ॥४-१२॥

kāṅkṣantaḥ karmaṇāṁ siddhiṁ yajanta iha devatāḥ | kṣipraṁ hi mānuṣe loke siddhirbhavati karmajā || 4-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2632
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 13

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः ।
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ॥४-१३॥

cāturvarṇyaṁ mayā sṛṣṭaṁ guṇakarmavibhāgaśaḥ | tasya kartāramapi māṁ viddhyakartāramavyayam || 4-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2675
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 14

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृह ।
इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ॥४-१४॥

na māṁ karmāṇi limpanti na me karmaphale spṛhā | iti māṁ yo'bhijānāti karmabhirna sa badhyate || 4-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2718
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 15

एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः ।
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ॥४-१५॥

evaṁ jñātvā kṛtaṁ karma pūrvairapi mumukṣubhiḥ | kuru karmaiva tasmāttvaṁ pūrvaiḥ pūrvataraṁ kṛtam || 4-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2761
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 15 के पश्चात चिंतन
2804
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 16

किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः ।
तत् ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥४-१६॥

kiṁ karma kimakarmeti kavayo'pyatra mohitāḥ | tat te karma pravakṣyāmi yajjñātvā mokṣyase'śubhāt || 4-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2847
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 17

कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः ।
अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः ॥४-१७॥

karmaṇo hyapi boddhavyaṁ boddhavyaṁ ca vikarmaṇaḥ | akarmaṇaśca boddhavyaṁ gahanā karmaṇo gatiḥ || 4-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2890
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 18

कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः ।
स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत् ॥४-१८॥

karmaṇyakarma yaḥ paśyedakarmaṇi ca karma yaḥ | sa buddhīmānmanuṣyeṣu sa yuktaḥ kṛtsnakarmakṛt || 4-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2933
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 19

यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः ।
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ॥४-१९॥

yasya sarve samārambhāḥ kāmasaṅkalpavarjitāḥ | jñānāgnidagdhakarmāṇaṁ tamāhuḥ paṇḍitaṁ budhāḥ || 4-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2976
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 20

त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः ।
कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किञ्चित्करोति सः ॥४-२०॥

tyaktvā karmaphalāsaṅgaṁ nityatṛpto nirāśrayaḥ | karmaṇyabhipravṛtto'pi naiva kiñcitkaroti saḥ || 4-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

519
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 21

निराशीर्यतचित्तात्मा त्यक्तसर्वपरिग्रहः ।
शारीरं केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम् ॥४-२१॥

nirāśīryatacittātmā tyaktasarvaparigrahaḥ | śārīraṁ kevalaṁ karma kurvannāpnoti kilbiṣam || 4-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

562
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 22

यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः ।
समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते ॥४-२२॥

yadṛcchālābhasantuṣṭo dvandvātīto vimatsaraḥ | samaḥ siddhāvasiddhau ca kṛtvāpi na nibadhyate || 4-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

605
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 23

गतसङ्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः ।
यज्ञायाचरतः कर्म समग्रं प्रविलीयते ॥४-२३॥

gatasaṅgasya muktasya jñānāvasthitacetasaḥ | yajñāyācarataḥ karma samagraṁ pravilīyate || 4-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

648
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 23 के पश्चात चिंतन
691
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 24

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥४-२४॥

brahmārpaṇaṁ brahma havirbrahmāgnau brahmaṇā hutam | brahmaiva tena gantavyaṁ brahmakarmasamādhinā || 4-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

734
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 25

दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते ।
ब्रह्माग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनेवोपजुह्वति ॥४-२५॥

daivamevāpare yajñaṁ yoginaḥ paryupāsate | brahmāgnāvapare yajñaṁ yajñenaivopajuhvati || 4-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

777
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 26

श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति ।
शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति ॥४-२६॥

śrotrādīnīndriyāṇyanye saṁyamāgniṣu juhvati | śabdādīnviṣayānanya indriyāgniṣu juhvati || 4-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

820
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 27

सर्वाणीन्द्रियकर्माणि प्राणकर्माणि चापरे ।
आत्मसंयमयोगाग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते ॥४-२७॥

sarvāṇīndriyakarmāṇi prāṇakarmāṇi cāpare | ātmasaṁyamayogāgnau juhvati jñānadīpite || 4-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

863
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 28

द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथापरे ।
स्वाध्यायज्ञानयज्ञाश्च यतयः संशितव्रताः ॥४-२८॥

dravyayajñāstapoyajñā yogayajñāstathāpare | svādhyāyajñānayajñāśca yatayaḥ saṁśitavratāḥ || 4-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

906
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 29

अपाने जुह्वति प्राणं प्राणेऽपानं तथापरे ।
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः
अपरे नियताहाराः प्राणान्प्राणेषु जुह्वति ॥४-२९॥

apāne juhvati prāṇaṁ prāṇe'pānaṁ tathāpare | prāṇāpānagatī ruddhvā prāṇāyāmaparāyaṇāḥ | apare niyatāhārāḥ prāṇānprāṇeṣu juhvati || 4-29 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

949
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 30

सर्वेऽप्येते यज्ञविदो यज्ञक्षपितकल्मषाः ।
यज्ञशिष्टामृतभुजो यान्ति ब्रह्म सनातनम् ॥४-३०॥

sarve'pyete yajñavido yajñakṣapitakalmaṣāḥ | yajñaśiṣṭāmṛtabhujo yānti brahma sanātanam || 4-30 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

992
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 31

नायं लोकोऽस्त्ययज्ञस्य कुतोऽन्यः कुरुसत्तम ॥४-३१॥

nāyaṁ loko'styayajñasya kuto'nyaḥ kurusattama || 4-31 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1035
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 32

एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे ।
कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे ॥४-३२॥

evaṁ bahuvidhā yajñā vitatā brahmaṇo mukhe | karmajānviddhi tānsarvānevaṁ jñātvā vimokṣyase || 4-32 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1078
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 32 के पश्चात चिंतन
1121
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 33

श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप ।
सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते ॥४-३३॥

śreyāndravyamayādyajñājjñānayajñaḥ parantapa | sarvaṁ karmākhilaṁ pārtha jñāne parisamāpyate || 4-33 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1164
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 34

तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥४-३४॥

tadviddhi praṇipātena paripraśnena sevayā | upadekṣyanti te jñānaṁ jñāninastattvadarśinaḥ || 4-34 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1207
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 35

यज्ज्ञात्वा न पुनर्मोहमेवं यास्यसि पाण्डव ।
येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मयि ॥४-३५॥

yajjñātvā na punarmohamevaṁ yāsyasi pāṇḍava | yena bhūtānyaśeṣeṇa drakṣyasyātmanyatho mayi || 4-35 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1250
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 36

अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः ।
सर्वं ज्ञानप्लवेनैव वृजिनं सन्तरिष्यसि ॥४-३६॥

api cedasi pāpebhyaḥ sarvebhyaḥ pāpakṛttamaḥ | sarvaṁ jñānaplavenaiva vṛjinaṁ santariṣyasi || 4-36 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1293
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 37

यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन ।
ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ॥४-३७॥

yathaidhāṁsi samiddho'gnirbhasmasātkurute'rjuna | jñānāgniḥ sarvakarmāṇi bhasmasātkurute tathā || 4-37 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1336
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 38

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।
तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति ॥४-३८॥

na hi jñānena sadṛśaṁ pavitramiha vidyate | tatsvayaṁ yogasaṁsiddhaḥ kālenātmani vindati || 4-38 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1379
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 38 के पश्चात चिंतन
1422
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 39

श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः ।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ॥४-३९॥

śraddhāvām̐llabhate jñānaṁ tatparaḥ saṁyatendriyaḥ | jñānaṁ labdhvā parāṁ śāntimacireṇādhigacchati || 4-39 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1465
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 40

अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति ।
नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः ॥४-४०॥

ajñaścāśraddadhānaśca saṁśayātmā vinaśyati | nāyaṁ loko'sti na paro na sukhaṁ saṁśayātmanaḥ || 4-40 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1508
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 41

योगसंन्यस्तकर्माणं ज्ञानसञ्छिन्नसंशयम् ।
आत्मवन्तं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय ॥४-४१॥

yogasaṁnyastakarmāṇaṁ jñānasañchinnasaṁśayam | ātmavantaṁ na karmāṇi nibadhnanti dhanañjaya || 4-41 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1551
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 42

तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः ।
छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥४-४२॥

tasmādajñānasambhūtaṁ hṛtsthaṁ jñānāsinātmanaḥ | chittvainaṁ saṁśayaṁ yogamātiṣṭhottiṣṭha bhārata || 4-42 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1594
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 4 • श्लोक क्रमांक 43

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
ज्ञानयोगो नाम चतुर्थोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde jñānayogo nāma caturtho'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1637
Daily Gita Sadhana

Listen to One Sacred Verse Daily & Practice in Life

Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्