भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 1

अर्जुन उवाच ।
संन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि ।
यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ॥५-१॥

arjuna uvāca | saṁnyāsaṁ karmaṇāṁ kṛṣṇa punaryogaṁ ca śaṁsasi | yacchreya etayorekaṁ tanme brūhi suniścitam || 5-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1680
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 2

श्रीभगवानुवाच ।
संन्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ ।
tayoḥ tu karmasaṁnyāsāt karmayogo viśiṣyate ॥५-२॥

śrībhagavānuvāca | saṁnyāsaḥ karmayogaśca niḥśreyasakarāvubhau | tayostu karmasaṁnyāsātkarmayogo viśiṣyate || 5-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1723
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 3

ज्ञेयः स नित्यसंन्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति ।
निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते ॥५-३॥

jñeyaḥ sa nityasaṁnyāsī yo na dveṣṭi na kāṅkṣati | nirdvandvo hi mahābāho sukhaṁ bandhātpramucyate || 5-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1766
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 4

साङ्ख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पण्डिताः ।
एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ॥५-४॥

sāṅkhyayogau pṛthagbālāḥ pravadanti na paṇḍitāḥ | ekamapyāsthitaḥ samyagubhayorvindate phalam || 5-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1809
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 5

यत्साङ्ख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्योगैरपि गम्यते ।
एकं साङ्ख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति ॥५-५॥

yatsāṅkhyaiḥ prāpyate sthānaṁ tadyogairapi gamyate | ekaṁ sāṅkhyaṁ ca yogaṁ ca yaḥ paśyati sa paśyati || 5-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1852
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 5 के पश्चात चिंतन
1895
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 6

संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः ।
योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म नचिरेणाधिगच्छति ॥५-६॥

saṁnyāsastu mahābāho duḥkhamāptumayogataḥ | yogayukto munirbrahma nacireṇādhigacchati || 5-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1938
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 7

योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः ।
सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते ॥५-७॥

yogayukto viśuddhātmā vijitātmā jitendriyaḥ | sarvabhūtātmabhūtātmā kurvannapi na lipyate || 5-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1981
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 8

नैव किञ्चित्करोमीति युक्तो मन्येत तत्त्ववित् ।
पश्यञ्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपञ्श्वसन् ॥५-८॥

naiva kiñcitkaromīti yukto manyeta tattvavit | paśyañśṛṇvanspṛśañjighrannaśnangacchansvapañśvasan || 5-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2024
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 9

प्रलपन्विसृजन्गृह्णन्नुन्मिषन्निमिषन्नपि ।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेषु वर्तन्त इति धारयन् ॥५-९॥

pralapanvisṛjangṛhṇannunmiṣannimiṣannapi | indriyāṇīndriyārtheṣu vartanta iti dhārayan || 5-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2067
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 10

ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः ।
लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा ॥५-१०॥

brahmaṇyādhāya karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā karoti yaḥ | lipyate na sa pāpena padmapatramivāmbhasā || 5-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2110
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 11

कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि ।
योगिनः कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वात्मशुद्धये ॥५-११॥

kāyena manasā buddhyā kevalairindriyairapi | yoginaḥ karma kurvanti saṅgaṁ tyaktvātmaśuddhaye || 5-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2153
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 12

युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् ।
अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते ॥५-१२॥

yuktaḥ karmaphalaṁ tyaktvā śāntimāpnoti naiṣṭhikīm | ayuktaḥ kāmakāreṇa phale sakto nibadhyate || 5-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2196
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 13

सर्वकर्माणि मनसा संन्यस्यास्ते सुखं वशी ।
नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न कारयन् ॥५-१३॥

sarvakarmāṇi manasā saṁnyasyāste sukhaṁ vaśī | navadvāre pure dehī naiva kurvanna kārayan || 5-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2239
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 14

न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः ।
न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥५-१४॥

na kartṛtvaṁ na karmāṇi lokasya sṛjati prabhuḥ | na karmaphalasaṁyogaṁ svabhāvastu pravartate || 5-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2282
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 15

नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभुः ।
अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः ॥५-१५॥

nādatte kasyacitpāpaṁ na caiva sukṛtaṁ vibhuḥ | ajñānenāvṛtaṁ jñānaṁ tena muhyanti jantavaḥ || 5-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2325
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 16

ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः ।
तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ॥५-१६॥

jñānena tu tadajñānaṁ yeṣāṁ nāśitamātmanaḥ | teṣāmādityavajjñānaṁ prakāśayati tatparam || 5-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2368
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 17

तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः ।
गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ॥५-१७॥

tadbuddhayastadātmānastanniṣṭhāstatparāyaṇāḥ | gacchantyapunarāvṛttiṁ jñānanirdhūtakalmaṣāḥ || 5-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2411
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 18

विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि ।
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ॥५-१८॥

vidyāvinayasampanne brāhmaṇe gavi hastini | śuni caiva śvapāke ca paṇḍitāḥ samadarśinaḥ || 5-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2454
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 19

इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः ।
निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः ॥५-१९॥

ihaiva tairjitaḥ sargo yeṣāṁ sāmye sthitaṁ manaḥ | nirdoṣaṁ hi samaṁ brahma tasmādbrahmaṇi te sthitāḥ || 5-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2497
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 20

न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत्प्राप्य चाप्रियम् ।
स्थिरबुद्धिरसम्मूढो ब्रह्मविद्ब्रह्मणि स्थितः ॥५-२०॥

na prahṛṣyetpriyaṁ prāpya nodvijetprāpya cāpriyam | sthirabuddhirasammūḍho brahmavidbrahmaṇi sthitaḥ || 5-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2540
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 20 के पश्चात चिंतन
2583
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 21

बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् ।
स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते ॥५-२१॥

bāhyasparśeṣvasaktātmā vindatyātmani yatsukham | sa brahmayogayuktātmā sukhamakṣayamaśnute || 5-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2626
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 22

ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते ।
आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥५-२२॥

ye hi saṁsparśajā bhogā duḥkhayonaya eva te | ādyantavantaḥ kaunteya na teṣu ramate budhaḥ || 5-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2669
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 23

शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् ।
कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः ॥५-२३॥

śaknotīhaiva yaḥ soḍhuṁ prākśarīravimokṣaṇāt | kāmakrodhodbhavaṁ vegaṁ sa yuktaḥ sa sukhī naraḥ || 5-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2712
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 24

योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः ।
स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥५-२४॥

yo'ntaḥsukho'ntarārāmastathāntarjyotireva yaḥ | sa yogī brahmanirvāṇaṁ brahmabhūto'dhigacchati || 5-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2755
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 25

लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।
छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥५-२५॥

labhante brahmanirvāṇamṛṣayaḥ kṣīṇakalmaṣāḥ | chinnadvaidhā yatātmānaḥ sarvabhūtahite ratāḥ || 5-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2798
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 26

कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् ।
अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥५-२६॥

kāmakrodhaviyuktānāṁ yatīnāṁ yatacetasām | abhito brahmanirvāṇaṁ vartate viditātmanām || 5-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2841
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 27

स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे भ्रुवोः ।
प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ॥५-२७॥

sparśānkṛtvā bahirbāhyāṁścakṣuścaivāntare bhruvoḥ | prāṇāpānau samau kṛtvā nāsābhyantaracāriṇau || 5-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2884
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 28

यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः ।
विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ॥५-२८॥

yatendriyamanobuddhirmunirmokṣaparāyaṇaḥ | vigatecchābhayakrodho yaḥ sadā mukta eva saḥ || 5-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2927
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 29

भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।
सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥५-२९॥

bhoktāraṁ yajñatapasāṁ sarvalokamaheśvaram | suhṛdaṁ sarvabhūtānāṁ jñātvā māṁ śāntimṛcchati || 5-29 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2970
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 29 के पश्चात चिंतन
513
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 5 • श्लोक क्रमांक 30

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
कर्मसंन्यासयोगो नाम पञ्चमोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde karmasaṁnyāsayogo nāma pañcamo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

556
Daily Gita Sadhana

Listen to One Sacred Verse Daily & Practice in Life

Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्