भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 1

श्रीभगवानुवाच ।
अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः ।
स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥६-१॥

śrībhagavānuvāca | anāśritaḥ karmaphalaṁ kāryaṁ karma karoti yaḥ | sa saṁnyāsī ca yogī ca na niragnirna cākriyaḥ || 6-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

599
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 2

यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पाण्डव ।
न ह्यसंन्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन ॥६-२॥

yaṁ saṁnyāsamiti prāhuryogaṁ taṁ viddhi pāṇḍava | na hyasaṁnyastasaṅkalpo yogī bhavati kaścana || 6-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

642
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 3

आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते ।
योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ॥६-३॥

ārurukṣormuneryogaṁ karma kāraṇamucyate | yogārūḍhasya tasyaiva śamaḥ kāraṇamucyate || 6-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

685
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 4

यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते ।
सर्वसङ्कल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥६-४॥

yadā hi nendriyārtheṣu na karmasvanuṣajjate | sarvasaṅkalpasaṁnyāsī yogārūḍhastadocyate || 6-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

728
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 5

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥६-५॥

uddharedātmanātmānaṁ nātmānamavasādayet | ātmaiva hyātmano bandhurātmaiva ripurātmanaḥ || 6-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

771
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 6

बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः ।
अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ॥६-६॥

bandhurātmātmanastasya yenātmaivātmanā jitaḥ | anātmanastu śatrutve vartetātmaiva śatruvat || 6-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

814
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 7

जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः ।
शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥६-७॥

jitātmanaḥ praśāntasya paramātmā samāhitaḥ | śītoṣṇasukhaduḥkheṣu tathā mānāpamānayoḥ || 6-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

857
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 7 के पश्चात चिंतन
900
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 8

ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा कूटस्थो विजितेन्द्रियः ।
युक्त इत्युच्यते योगी समलोष्टाश्मकाञ्चनः ॥६-८॥

jñānavijñānatṛptātmā kūṭastho vijitendriyaḥ | yukta ityucyate yogī samaloṣṭāśmakāñcanaḥ || 6-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

943
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 9

सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु ।
साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते ॥६-९॥

suhṛnmitrāryudāsīnamadhyasthadveṣyabandhuṣu | sādhuṣvapi ca pāpeṣu samabuddhirviśiṣyate || 6-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

986
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 10

योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः ।
एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ॥६-१०॥

yogī yuñjīta satatamātmānaṁ rahasi sthitaḥ | ekākī yatacittātmā nirāśīraparigrahaḥ || 6-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1029
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 11

शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः ।
नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम् ॥६-११॥

śucau deśe pratiṣṭhāpya sthiramā繰namātmanaḥ | nātyucchritaṁ nātinīcaṁ cailājinakuśottaram || 6-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1072
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 12

तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः ।
उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ॥६-१२॥

tatraikāgraṁ manaḥ kṛtvā yatacittendriyakriyaḥ | upaviśyāsane yuñjyādyogamātmaviśuddhaye || 6-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1115
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 13

समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः ।
सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥६-१३॥

samaṁ kāyaśirogrīvaṁ dhārayannacalaṁ sthiraḥ | samprekṣya nāsikāgraṁ svaṁ diśaścānavalokayan || 6-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1158
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 14

प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः ।
मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः ॥६-१४॥

praśāntātmā vigatabhīrbrahmacārivrate sthitaḥ | manaḥ saṁyamya maccitto yukta āsīta matparaḥ || 6-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1201
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 15

युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी नियतमानसः ।
शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति ॥६-१५॥

yuñjannevaṁ sadātmānaṁ yogī niyatamānasaḥ | śāntiṁ nirvāṇaparamāṁ matsaṁsthāmadhigacchati || 6-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1244
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 16

नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः ।
न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ॥६-१६॥

nātyaśnatastu yogo'sti na caikāntamanaśnataḥ | na cāti svapnaśīlasya jāgrato naiva cārjuna || 6-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1287
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 17

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु ।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥६-१७॥

yuktāhāravihārasya yuktaceṣṭasya karmasu | yuktasvapnāvabodhasya yogo bhavati duḥkhahā || 6-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1330
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 17 के पश्चात चिंतन
1373
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 18

यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते ।
निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा ॥६-१८॥

yadā viniyataṁ cittamātmanyevāvatiṣṭhate | niḥspṛhaḥ sarvakāmebhyo yukta ityucyate tadā || 6-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1416
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 19

यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता ।
योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥६-१९॥

yathā dīpo nivātastho neṅgate sopamā smṛtā | yogino yatacittasya yuñjato yogamātmanaḥ || 6-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1459
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 20

यत्रोपरमते चित्तं निरुद्धं योगसेवया ।
यत्र चैवात्मनात्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति ॥६-२०॥

yatroparamate cittaṁ niruddhaṁ yogasevayā | yatra caivātmanātmānaṁ paśyannātmani tuṣyati || 6-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1502
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 21

सुखमात्यन्तिकं यत्तद्बुद्धिग्राह्यमतीन्द्रियम् ।
वेत्ति यत्र न चैवायं स्थितश्चलति तत्त्वतः ॥६-२१॥

sukhamātyantikaṁ yattadbuddhigrāhyamatīndriyam | vetti yatra na caivāyaṁ sthitaścalati tattvataḥ || 6-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1545
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 22

यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः ।
यस्मिन्स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते ॥६-२२॥

yaṁ labdhvā cāparaṁ lābhaṁ manyate nādhikaṁ tataḥ | yasminsthito na duḥkhena guruṇāpi vicālyate || 6-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1588
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 23

तं विद्याद् दुःखसंयोगवियोगं योगसञ्जितम् ।
स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ॥६-२३॥

taṁ vidyād duḥkhasaṁyogaviyogaṁ yogasañjitam | sa niścayena yoktavyo yogo'nirviṇṇacetasā || 6-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1631
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 24

सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः ।
मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः ॥६-२४॥

saṅkalpaprabhavānkāmāṁstyaktvā sarvānaśeṣataḥ | manasaivendriyagrāmaṁ viniyamya samantataḥ || 6-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1674
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 25

शनैः शनैरुपरमेद्बुद्ध्या धृतिगृहीतया ।
आत्मसंस्थं मनः कृत्वा न किञ्चिदपि चिन्तयेत् ॥६-२५॥

śanaiḥ śanairuparamedbuddhyā dhṛtigṛhītayā | ātmasaṁsthaṁ manaḥ kṛtvā na kiñcidapi cintayet || 6-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1717
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 26

यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम् ।
ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत् ॥६-२६॥

yato yato niścarati manaścañcalamasthiram | tatastato niyamyaitadātmanyeva vaśaṁ nayet || 6-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1760
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 27

प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम् ।
उपैति शान्तरजसं ब्रह्मभूतमकल्मषम् ॥६-२७॥

praśāntamanasaṁ hyenaṁ yoginaṁ sukhamuttamam | upaiti śāntarajasaṁ brahmabhūtamakalmaṣam || 6-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1803
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 28

युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी विगतकल्मषः ।
सुखेन ब्रह्मसंस्पर्शमत्यन्तं सुखमश्नुते ॥६-२८॥

yuñjannevaṁ sadātmānaṁ yogī vigatakalmaṣaḥ | sukhena brahmasaṁsparśamatyantaṁ sukhamaśnute || 6-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1846
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 28 के पश्चात चिंतन
1889
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 29

सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि ।
ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः ॥६-२९॥

sarvabhūtasthamātmānaṁ sarvabhūtāni cātmani | īkṣate yogayuktātmā sarvatra samadarśanaḥ || 6-29 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1932
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 30

यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति ।
तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति ॥६-३०॥

yo māṁ paśyati sarvatra sarvaṁ ca mayi paśyati | tasyāhaṁ na praṇaśyāmi sa ca me na praṇaśyati || 6-30 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

1975
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 31

सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः ।
सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते ॥६-३१॥

sarvabhūtasthitaṁ yo māṁ bhajatyekatvamāsthitaḥ | sarvathā vartamāno'pi sa yogī mayi vartate || 6-31 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2018
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 32

आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन ।
सुखं वा यदि वा दुःखं स योगी परमो मतः ॥६-३२॥

ātmaupamyena sarvatra samaṁ paśyati yo'rjuna | sukhaṁ vā yadi vā duḥkhaṁ sa yogī paramo mataḥ || 6-32 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2061
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 33

अर्जुन उवाच ।
योऽयं योगस्त्वया प्रोक्तः साम्येन मधुसूदन ।
एतस्याहं न पश्यामि चञ्चलत्वात्स्थितिं स्थिराम् ॥६-३३॥

arjuna uvāca | yo'yaṁ yogastvayā proktaḥ sāmyena madhusūdana | etasyāhaṁ na paśyāmi cañcalatvātsthitiṁ sthirām || 6-33 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2104
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 34

चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम् ।
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ॥६-३४॥

cañcalaṁ hi manaḥ kṛṣṇa pramāthi balavaddṛḍham | tasyāhaṁ nigrahaṁ manye vāyoriva suduṣkaram || 6-34 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2147
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 35

श्रीभगवानुवाच ।
असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् ।
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ॥६-३५॥

śrībhagavānuvāca | asaṁśayaṁ mahābāho mano durnigrahaṁ calam | abhyāsena tu kaunteya vairāgyeṇa ca gṛhyate || 6-35 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2190
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 36

असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः ।
वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायतः ॥६-३६॥

asaṁyatātmanā yogo duṣprāpa iti me matiḥ | vaśyātmanā tu yatatā śakyo'vāptumupāyataḥ || 6-36 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2233
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 36 के पश्चात चिंतन
2276
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 37

अर्जुन उवाच ।
अयतिः श्रद्धयोपेतो योगाच्चचलितमानसः ।
अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति ॥६-३७॥

arjuna uvāca | ayatiḥ śraddhayopeto yogāccalitamānasaḥ | aprāpya yogasaṁsiddhiṁ kāṁ gatiṁ kṛṣṇa gacchati || 6-37 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2319
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 38

कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति ।
अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मणः पथि ॥६-३८॥

kaccinnobhayavibhraṣṭaśchinnābhramiva naśyati | apratiṣṭho mahābāho vimūḍho brahmaṇaḥ pathi || 6-38 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2362
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 39

एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः ।
त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते ॥६-३९॥

etanme saṁśayaṁ kṛṣṇa chettumarhasyaśeṣataḥ | tvadanyaḥ saṁśayasyāsya chettā na hyupapadyate || 6-39 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2405
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 40

श्रीभगवानुवाच ।
पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते ।
न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥६-४०॥

śrībhagavānuvāca | pārtha naiveha nāmutra vināśastasya vidyate | na hi kalyāṇakṛtkaściddurgatiṁ tāta gacchati || 6-40 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2448
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 41

प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः ।
शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रष्टोऽभिजायते ॥६-४१॥

prāpya puṇyakṛtāṁ lokānuṣitvā śāśvatīḥ samāḥ | śucīnāṁ śrīmatāṁ gehe yogabhraṣṭo'bhijāyate || 6-41 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2491
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 42

अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् ।
एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ॥६-४२॥

athavā yogināmeva kule bhavati dhīmatām | etaddhi durlabhataraṁ loke janma yadīdṛśam || 6-42 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2534
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 43

तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम् ।
यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन ॥६-४३॥

tatra taṁ buddhisaṁyogaṁ labhate paurvadehikam | yatate ca tato bhūyaḥ saṁsiddhau kurunandana || 6-43 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2577
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 44

पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोऽपि सः ।
जिज्ञासुरपि योगस्य शब्दब्रह्मातिवर्तते ॥६-४४॥

pūrvābhyāsena tenaiva hriyate hyavaśo'pi saḥ | jijñāsurapi yogasya śabdabrahmātivartate || 6-44 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2620
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 45

प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः ।
अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम् ॥६-४५॥

prayatnādyatamānastu yogī saṁśuddhakilbiṣaḥ | anekajanmasaṁsiddhastato yāti parāṁ gatim || 6-45 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2663
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 46

तपस्विभ्योऽधिको योगी ज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिकः ।
कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन ॥६-४६॥

tapasvibhyo'dhiko yogī jñānibhyo'pi mato'dhikaḥ | karmibhyaścādhiko yogī tasmādyogī bhavārjuna || 6-46 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2706
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 47

योगिनापि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना ।
श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः ॥६-४७॥

yogināmapi sarveṣāṁ madgatenāntarātmanā | śraddhāvānbhajate yo māṁ sa me yuktatamo mataḥ || 6-47 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2749
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 47 के पश्चात चिंतन
2792
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 6 • श्लोक क्रमांक 48

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
ध्यानयोगो नाम षष्ठोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde dhyānayogo nāma ṣaṣṭho'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

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Daily Gita Sadhana

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Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्