भक्ति की सभा
ॐ
श्रीमद्भागवत महापुराण
PURAN महर्षि वेदव्यास प्रणीत

श्रीमद्भागवत महापुराण

भगवान श्रीकृष्ण की बाल व रास लीलाओं और नवधा भक्ति का सर्वोच्च महाग्रंथ।

अनुवाद भाषा:
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 1

अर्जुन उवाच ।
किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम ।
अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥८-१॥

arjuna uvāca | kiṁ tadbrahma kimadhyātmaṁ kiṁ karma puruṣottama | adhibhūtaṁ ca kiṁ proktamadhidaivaṁ kimucyate || 8-1 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2012
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 2

अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन ।
प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥८-२॥

adhiyajñaḥ kathaṁ ko'tra dehe'sminmadhusūdana | prayāṇakāle ca kathaṁ jñeyo'si niyatātmabhiḥ || 8-2 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2055
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 2 के पश्चात चिंतन
2098
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 3

श्रीभगवानुवाच ।
अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते ।
भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसञ्जितः ॥८-३॥

śrībhagavānuvāca | akṣaraṁ brahma paramaṁ svabhāvo'dhyātmamucyate | bhūtabhāvodbhavakaro visargaḥ karmasañjitaḥ || 8-3 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2141
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 4

अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्चाधिदैवतम् ।
अधियज्ञोऽहमेवात्र देहे देहभृतां वर ॥८-४॥

adhibhūtaṁ kṣaro bhāvaḥ puruṣaścādhidaivatam | adhiyajño'hamevātra dehe dehabhṛtāṁ vara || 8-4 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2184
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 5

अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् ।
यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः ॥८-५॥

antakāle ca māmeva smaranmuktvā kalevaram | yaḥ prayāti sa madbhāvaṁ yāti nāstyatra saṁśayaḥ || 8-5 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2227
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 6

यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् ।
तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः ॥८-६॥

yaṁ yaṁ vāpi smaranbhāvaṁ tyajatyante kalevaram | taṁ tamevaiti kaunteya sadā tadbhāvabhāvitaḥ || 8-6 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2270
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 7

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च ।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः ॥८-७॥

tasmātsarveṣu kāleṣu māmanusmara yudhya ca | mayyarpitamanobuddhirmāmevaiṣyasyasaṁśayaḥ || 8-7 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2313
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 7 के पश्चात चिंतन
2356
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 8

अभ्यासयोगयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना ।
परमं पुरुषं दिव्यं याति पार्थानुचिन्तयन् ॥८-८॥

abhyāsayogayuktena cetasā nānyagāminā | paramaṁ puruṣaṁ divyaṁ yāti pārthānucintayan || 8-8 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2399
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 9

कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः ।
सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥८-९॥

kaviṁ purāṇamanuśāsitāramaṇoraṇīyāṁsamanusmaredyaḥ | sarvasya dhātāramacintyarūpamādityavarṇaṁ tamasaḥ parastāt || 8-9 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2442
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 10

प्रयाणकाले मनसाऽचलेन भक्त्या युक्तो योगबलेन चैव ।
भ्रुवोर्मध्ये प्राणमावेश्य सम्यक्स तं परं पुरुषमुपैति दिव्यम् ॥८-१०॥

prayāṇakāle manasā'calena bhaktyā yukto yogabalena caiva | bhruvormadhye prāṇamāveśya samyaksa taṁ paraṁ puruṣamupaiti divyam || 8-10 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2485
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 10 के पश्चात चिंतन
2528
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 11

यदक्षरं वेदविदो वदन्ति विशन्ति यद्यतयो वीतरागाः ।
यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं सङ्ग्रहेण प्रवक्ष्ये ॥८-११॥

yadakṣaraṁ vedavido vadanti viśanti yadyatayo vītarāgāḥ | yadicchanto brahmacaryaṁ caranti tatte padaṁ saṅgraheṇa pravakṣye || 8-11 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2571
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 12

सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च ।
मूर्ध्न्याधायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम् ॥८-१२॥

sarvadvārāṇi saṁyamya mano hṛdi nirudhya ca | mūrdhnyādhāyātmanaḥ prāṇamāsthito yogadhāraṇām || 8-12 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2614
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 13

ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् ।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥८-१३॥

omityekākṣaraṁ brahma vyāharanmāmanusmaran | yaḥ prayāti tyajandehaṁ sa yāti paramāṁ gatim || 8-13 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2657
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 14

अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः ।
तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः ॥८-१४॥

ananyacetāḥ satataṁ yo māṁ smarati nityaśaḥ | tasyāhaṁ sulabhaḥ pārtha nityayuktasya yoginaḥ || 8-14 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2700
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 15

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् ।
नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥८-१५॥

māmupetya punarjanma duḥkhālayamaśāśvatam | nāpnuvanti mahātmānaḥ saṁsiddhiṁ paramāṁ gatāḥ || 8-15 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2743
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 15 के पश्चात चिंतन
2786
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 16

आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन ।
मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥८-१६॥

ābrahmabhuvanāllokāḥ punarāvartino'rjuna | māmupetya tu kaunteya punarjanma na vidyate || 8-16 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2829
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 17

सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुः ।
रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः ॥८-१७॥

sahasrayugaparyantamaharyadbrahmaṇo viduḥ | rātriṁ yugasahasrāntāṁ te'horātravido janāḥ || 8-17 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2872
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 18

अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे ।
रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसञ्ज्ञके ॥८-१८॥

avyaktādvyaktayaḥ sarvāḥ prabhavantyaharāgame | rātryāgame pralīyante tatraivāvyaktasañjñake || 8-18 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2915
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 19

भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते ।
रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे ॥८-१९॥

bhūtagrāmaḥ sa evāyaṁ bhūtvā bhūtvā pralīyate | rātryāgame'vaśaḥ pārtha prabhavatyaharāgame || 8-19 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

2958
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 20

परस्तस्मात्तु भावोऽन्योऽव्यक्तोऽव्यक्तात्सनातनः ।
यः स सर्वेषु भूतेषु नश्यत्सु न विनश्यति ॥८-२०॥

parastasmāttu bhāvo'nyo'vyakto'vyaktātsanātanaḥ | yaḥ sa sarveṣu bhūteṣu naśyatsu na vinaśyati || 8-20 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

501
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 21

अव्यक्तोऽक्षर इत्युक्तस्तमाहुः परमां गतिम् ।
यं प्राप्य न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥८-२१॥

avyakto'kṣara ityuktastamāhuḥ paramāṁ gatim | yaṁ prāpya na nivartante taddhāma paramaṁ mama || 8-21 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

544
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 22

पुरुषः स परः पार्थ भक्त्या लभ्यस्त्वनन्यया ।
यस्यान्तःस्थानि भूतानि येन सर्वमिदं ततम् ॥८-२२॥

puruṣaḥ sa paraḥ pārtha bhaktyā labhyastvananyayā | yasyāntaḥsthāni bhūtāni yena sarvamidaṁ tatam || 8-22 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

587
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 22 के पश्चात चिंतन
630
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 23

यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः ।
प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥८-२३॥

yatra kāle tvanāvṛttimāvṛttiṁ caiva yoginaḥ | prayātā yānti taṁ kālaṁ vakṣyāmi bharatarṣabha || 8-23 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

673
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 24

अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम् ।
तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः ॥८-२४॥

agnirjyotirahaḥ śuklaḥ ṣaṇmāsā uttarāyaṇam | tatra prayātā gacchanti brahma brahmavido janāḥ || 8-24 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

716
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 25

धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासा दक्षिणायनम् ।
तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्य निवर्तते ॥८-२५॥

dhūmo rātristathā kṛṣṇaḥ ṣaṇmāsā dakṣiṇāyanam | tatra cāndramasaṁ jyotiryogī prāpya nivartate || 8-25 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

759
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 26

शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते ।
एकया यात्यनावृत्तिमन्ययावर्तते पुनः ॥८-२६॥

śuklakṛṣṇe gatī hyete jagataḥ śāśvate mate | ekayā yātyanāvṛttimanyayāvartate punaḥ || 8-26 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

802
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 27

नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन ।
तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन ॥८-२७॥

naite sṛtī pārtha jānanyogī muhyati kaścana | tasmātsarveṣu kāleṣu yogayukto bhavārjuna || 8-27 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

845
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 28

वेदेषु यज्ञेषु तपःसु चैव दानेषु यत्पुण्यफलं प्रदिष्टम् ।
अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम् ॥८-२८॥

vedeṣu yajñeṣu tapaḥsu caiva dāneṣu yatpuṇyaphalaṁ pradiṣṭam | atyeti tatsarvamidaṁ viditvā yogī paraṁ sthānamupaiti cādyam || 8-28 ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

888
ॐ
अनुवृत्ति एवं दार्शनिक सार श्लोक 28 के पश्चात चिंतन
931
Puran

श्रीमद्भागवत महापुराण

अध्याय 8 • श्लोक क्रमांक 29

ॐ तत्सदिति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां
वैयासिक्यां भीष्मपर्वाणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे
तारकब्रह्मयोगो नाम अष्टमोऽध्यायः ॥

oṁ tatsaditi śrīmahābhārate śatasāhasryāṁ saṁhitāyāṁ vaiyāsikyāṁ bhīṣmaparvāṇi śrīmadbhagavadgītāsūpaniṣatsu brahmavidyāyāṁ yogaśāstre śrīkṛṣṇārjunasaṁvāde tārakabrahmayogo nāma aṣṭamo'dhyāyaḥ ||

सरल भावार्थ (English):

इस भाषा में अनुवाद शीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

974
Daily Gita Sadhana

Listen to One Sacred Verse Daily & Practice in Life

Original Sanskrit verses of Shrimad Bhagavad Gita with accurate commentary in English & Indian regional languages.

भक्ति की सभा
सनातन धर्म की अपनी सभा पवित्र श्लोक व व्याख्या लोड हो रही है...
सत्यम् शिवम् सुन्दरम्